नयी दिल्ली 27 जून (वार्ता) ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए सैनिकों को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाये जा रहे विवाद पर रक्षा मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद अब सेना ने भी सफाई दी है और कहा है कि यह पहला मौका नहीं है जब इन सैनिकों की शाहदत को मान्यता दी गयी है इससे पहले भी इनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया है।
इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने इस बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पिछले वर्ष संसद में दिये गये बयान को लेकर उठाये जा रहे सवालों पर कहा कि इस बारे में कही जा रही बातें जानबूझकर गुमराह करने वाली और तथ्यों के हिसाब से गलत हैं।
सेना ने शनिवार को सोशल मीडिया एक पोस्ट में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसी खबरें चल रही हैं जिनमें गलत तरीके से यह कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान छह बहादुर सैनिकों की सर्वोच्च शहादत को हाल ही में पहली बार मान्यता दी गयी या लोगों के सामने लाया गया।
सेना ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाता है कि देश ने इन शहीद नायकों को बहुत पहले ही, यानी उन खबरों के आने से काफी समय पहले ही श्रद्धांजलि दे दी थी। तत्कालीन सैन्य संचालन महानिदेशक ने पिछले वर्ष 11 मई को आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन बहादुर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ड्यूटी पर उनकी शहादत को मान्यता दी। इन बहादुर सैनिकों को वीरता पुरस्कार दिये गयेए और इसकी जानकारी 14 अगस्त की प्रेस विज्ञप्ति में प्रकाशित की गयी। यह भारतीय रक्षा बलों की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप उनकी वीरता और सर्वोच्च शहादत को औपचारिक और राष्ट्रीय मान्यता देने जैसा था। साथ ही, भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बिना किसी देरी के इन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गयी।
इसके बाद भी देश इन नायकों को सम्मान देता रहा है। इस वर्ष जयपुर में आयोजित सेना दिवस परेड के दौरान सेना प्रमुख ने इनमें से तीन बहादुर सैनिकों के परिवारों को सेना पदक (वीरता) प्रदान किया, जबकि वायु सेना प्रमुख ने पिछले वर्ष अक्टूबर में गरिमापूर्ण समारोह में ऐसा ही किया। इससे देश की सेवा में अपनी जान गंवाने वालों का सम्मान करने के प्रति रक्षा बलों की अटूट प्रतिबद्धता फिर से जाहिर हुई।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों के नाम अंकित किये जाने के संबंध में, इस बात पर जोर दिया जाता है कि यह पवित्र प्रक्रिया एक स्थापित और स्पष्ट प्रोटोकॉल के तहत होती है। रक्षा बल इन तय प्रक्रियाओं का पूरी सावधानी, ध्यान और सम्मान के साथ पालन करते हैं, जो दिए जा रहे सम्मान की गरिमा के अनुरूप होता है। यह कहना कि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
सेना ने कहा है कि यह अफसोस की बात है कि इस मुद्दे को लेकर एक अनावश्यक और बेबुनियाद विवाद खड़ा हो गया है। ऐसी बातें न केवल तथ्यों को गलत तरीके से पेश करती हैं, बल्कि शोक संतप्त परिवारों को अनावश्यक दुख पहुंचाने और देश की सेवा में सर्वोच्च शहादत देने वालों के सम्मान को कम करने का जोखिम भी पैदा करती हैं। सभी संबंधित लोगों से आग्रह है कि वे शहीद सैनिकों से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग करते समय जिम्मेदारी और संयम बरतें और बिना पुष्टि की गई जानकारी न फैलाएं। भारतीय रक्षा बल देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले हर सैनिक का सम्मान करने के अपने संकल्प पर अडिग हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के छह बहादुर सैनिक राष्ट्रीय नायक हैं, जिनका साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और बलिदान भारतीयों की पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उनकी याद का सम्मान हमेशा उस गरिमा, कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ किया जाएगा जिसके वे हकदार हैं।
