पवित्र नगरी की घोषणा के 17 साल बाद भी ताप्ती ट्रस्ट अधूरा, विधायक देशमुख ने कलेक्टर को लिखा पत्र

मुलताई। पवित्र नगरी में ताप्ती ट्रस्ट के गठन को लेकर विधायक चंद्रशेखर देशमुख ने कलेक्टर को पत्र लिखा हैं। वर्ष 2009 में मध्यप्रदेश शासन द्वारा राजपत्र में पवित्र नगरी घोषित किए जाने के बावजूद 17 वर्षों तक फाइलों में उलझा ताप्ती ट्रस्ट का मुद्दा अब एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र में आ गया है। मुलताई विधायक चन्द्रशेखर देशमुख ने जिला कलेक्टर बैतूल को पत्र प्रेषित कर पवित्र नगरी मुलताई में म.प्र. राजपत्र (असाधारण) में 23 जून 2009 को प्रकाशित अधिसूचना क्रमांक 233 का हवाला देते हुए स्पष्ट कहा है कि पवित्र नगरी घोषित होने के बाद से आज दिनांक तक ताप्ती ट्रस्ट का गठन नहीं होना मुलताई के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। विधायक ने पत्र में उल्लेख किया है कि श्री क्षेत्र ताप्ती उद्गम स्थल पर स्थित प्राचीन मंदिरों का संयुक्त रूप से राजस्व विभाग एवं नगरपालिका परिषद मुलताई द्वारा चिन्हांकन कराया गया था, जिसके बाद राजस्व विभाग ने अनुवृत्ति पत्र क्रमांक 0613/ब/121, वर्ष 2024-25, दिनांक 6 मई 2025 के माध्यम से मां ताप्ती के प्राचीन मंदिर सहित कुल 35 प्राचीन मंदिरों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर लिया है।

विधायक ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया है कि मां ताप्ती उद्गम सरोवर, विभिन्न पवित्र कुंडों तथा ताप्ती नदी के प्रवाह क्षेत्र का सीमांकन कर उन्हें नगरपालिका परिषद मुलताई क्षेत्र के अंतर्गत विधिवत दर्ज किया जा चुका है। वर्तमान में इन समस्त धार्मिक परिसंपत्तियों का स्वामित्व राजस्व अभिलेखों में कलेक्टर बैतूल के नाम सर्वराकार के रूप में दर्ज है। ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियम 1951 के प्रावधानों के तहत इन मंदिरों एवं सम्पूर्ण तीर्थ क्षेत्र के संरक्षण, प्रबंधन और विकास के लिए मां ताप्ती मंदिर समिति नाम से एक शासकीय ट्रस्ट का गठन आवश्यक बताया गया है। ताप्ती ट्रस्ट की मांग को बल देने वाले तथ्यों में नगरपालिका परिषद मुलताई की पहल भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने भी कलेक्टर बैतूल को पत्र लिखकर ताप्ती ट्रस्ट गठन की आवश्यकता जताई थी। प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया था कि वर्ष 2009 में पवित्र नगरी का दर्जा मिलने के बाद भी ट्रस्ट के अभाव में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की संभावनाएं अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकीं। इसके लिए राजपत्र की प्रति, 35 मंदिरों की सूची, खसरा प्रतियां तथा ताप्ती नदी सीमांकन रिपोर्ट भी संलग्न की गई थी।

मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम भी सक्रिय

इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष पर्यटन विभाग और मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की सक्रियता भी है। 11 सितंबर 2025 को तप्ती उद्गम स्थल, मुलताई, जिला बैतूल के विकास को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें इस क्षेत्र के धार्मिक और पर्यटन महत्व को रेखांकित करते हुए विकास की संभावनाओं पर विचार किया गया। दस्तावेजों में उल्लेख है कि सतपुड़ा के पठार पर स्थित मुलताई सूर्यपुत्री मां ताप्ती के उद्गम स्थल के रूप में देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां स्थित प्राचीन और नवीन मंदिरों में मां ताप्ती की पूजा होती है। नगर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 से जुड़ा हुआ है, मुलताई रेलवे स्टेशन इसकी निकटतम रेल संपर्क सुविधा है तथा नागपुर हवाई अड्डा लगभग 120 किलोमीटर दूर स्थित है। उद्गम स्थल नगर बस स्टैंड से मात्र 650 मीटर तथा रेलवे स्टेशन से लगभग 850 मीटर की दूरी पर स्थित है।

सरकार का ऐतिहासिक कदम माना जाएगा ट्रस्ट का गठन

सभी प्रशासनिक, राजस्व और पर्यटन संबंधी तैयारियों के बीच अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या 17 वर्षों से लंबित ताप्ती ट्रस्ट के गठन पर आखिरकार निर्णय होगा। विधायक चन्द्रशेखर देशमुख द्वारा कलेक्टर को लिखे गए पत्र ने इस मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। यदि मध्यप्रदेश शासन मां ताप्ती मंदिर समिति के गठन को मंजूरी देता है तो पवित्र नगरी मुलताई की धार्मिक पहचान, मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा, उद्गम क्षेत्र के संरक्षण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन निवेश और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।

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