अयोध्या:
दिल्ली डायरी प्रवेश कुमार मिश्र
अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से हुई हेराफेरी से आस्था पर कुठाराघात हुआ है. जिस तरह से रोज नए खुलासे हो रहे हैं उससे राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है. राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच की आंच से कई दबे-छुपे राज का पर्दा जिस तरह से बेपर्दा हुआ है उससे साफ है कि आस्था की आड़ में वर्षों से सुनियोजित हेराफेरी को अंजाम दिया जा रहा था. चर्चा है कि इस खुलासे के बाद भाजपा व संघ के शीर्ष पदधारी खासे बेचैन हो गए हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर पड़ने वाले राजनीतिक असर के साथ-साथ धार्मिक आस्था के साथ हुए विश्वासघात के कारण ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर उठ रहे सवालों के बाद राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर संघ काफी नाराज़ है. चर्चा है कि इस पूरे प्रकरण पर भाजपा द्वारा देश के सामने किस तरह का प्रतिक्रियावादी रूख अपनाया जाए , उसको लेकर सबसे ज्यादा मंथन चल रहा है. ऐसे सबकी निगाहें एसआईटी रिपोर्ट पर लगी हुई है.
जिस तरह से अचानक क्षेत्रीय दलों के अंदर टूट व बगावत आरंभ हुई है उसको लेकर सबसे ज्यादा डीएमके परेशान है. चर्चा है कि डीएमके रणनीतिकार अपने दल के लोकसभा सांसदों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं. दिल्ली में उनसे मुलाकात करने वाले लोगों के बारे में विस्तृत जानकारी ली जा रही है. इतना ही नहीं डीएमके अपने सांसदों को बेवजह दिल्ली जाने से बचने की हिदायत के साथ क्षेत्र में रहने के लिए दबाव बनाए हुए है. इसके अलावा डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन अपने सांसदों से खुद बात करके भविष्य की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं.
शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट में बगावत के बाद अब एक नई बहस आरंभ हो गई है कि असली शिवसेना कौन है. गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद शिंदे गुट अपने को असली शिवसेना बताकर बाला साहेब ठाकरे के मापदंड पर चलने वाले शिवसैनिक बता रहे हैं. जबकि उद्धव ठाकरे स्वयं को असली शिवसेना बताकर शिंदे गुट पर आरोप लगा रहे हैं. चर्चा है कि दिल्ली में बैठे शिंदे गुट के लोग महाराष्ट्र विधानसभा में मौजूद उद्धव गुट के विधायकों को भी तोड़ने की योजना बना रहे हैं. ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भाजपा की शह पर दूसरे क्षेत्रीय दलों के अंदर भी इसी तरह का प्रयोग होगा.
भाजपा संगठन के पुनर्गठन के साथ-साथ केन्द्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल होने वाला है ऐसे में दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भाजपाई सांसदों व वरिष्ठ नेताओं द्वारा खुले तौर पर लाबिंग दिख रही है. भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं व युवा नेताओं की अपेक्षा से अधिक आवाजाही इस बात को प्रमाणित कर रही है. इतना ही नहीं कुछ सांसद भी अपनी वरियता को आधार बनाकर मंत्रिमंडल में स्थान पाने के लिए वरिष्ठ मंत्रियों के माध्यम से लाबिंग कर रहे हैं.
राहुल गांधी इन दिनों देश की बड़ी युवा आबादी को साधने के लिए आक्रामक तरीके से राजनीति के केंद्र में आ रहे हैं. हाल ही में उन्होंने युवाओं के भविष्य, रोजगार और शिक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सीधे जमीनी और डिजिटल तौर पर जुड़ने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं. इसी क्रम में उन्होंने छात्रों की गूंज नाम से राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत पिछले दिनों कोटा से की है. इस अभियान के माध्यम से कांग्रेस पार्टी सरकार की शिक्षा नीति से परेशान युवा बेरोजगारों की आवाज बनकर सरकार पर दबाव बनाने के प्रयास में जुटी हुई है.
