​फायर सेफ्टी: भोपाल के कोचिंग सेंटरों में न वेंटिलेशन, न फायर एग्जिट; नगर निगम देगा नोटिस

भोपाल:लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद राजधानी में प्रशासन सतर्क हो गया है. जिसके चलते नगर निगम की फायर शाखा के दल ने कोचिंग सेंटरों की जांच की. यह निरीक्षण शहर के एमपी नगर जोन 1, जोन- 2, इंद्रपुरी, बैरागढ़, जवाहर चौक क्षेत्र में किया गया. फायर शाखा ने निरीक्षण कर जांच करने के लिए चार दल बनाये जो शहर के चार क्षेत्रों में जांच करने की कार्रवाई करते रहे. इस दौरान कुछ बड़ी कोचिंग सेंटरों में ही फायर सेफ्टी के नियम का पालन करते मिले. अधिकतर शहर की कोचिंग सेंटरों पर छात्रों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का फायर सेफ्टी की उपलब्धता नगण्य पाई गई.

जिनमें से एक ही दरवाजा, वेंटीलेशन, अग्रिशामक यंत्र तक नहीं पाए गए, इन कोचिंग सेटरों को नोटिस देने की तैयारी नगर निगम कर रहा है. वहीं कुछ पर ताले भी डाले जा सकते हैं. नगर निगम के फायर अधिकारी सौरभ पटेल ने बताया कि वैसे हमारे द्वारा शहर में फायर सेफ्टी चेकिंग का अभियान चलाया जाता है. लेकिन वर्तमान में हम फायर सेफ्टी को लेकर कोचिंग सेंटरों पर जांच कर रहे हैं. जिसमें जहां पर नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है उन पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है. शहर मेें एैसे दो दर्जन से अधिक कोचिंगसेंटर पाए गए हैं जहां पर छात्रों की सुरक्षा का ध्यान ही नहीं रखा गया है.
क्या है फायर सेफ्टी नियम
मध्यप्रदेश में फायर सेफ्टी नियम राज्य के सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, बहुमंजिला इमारतों, होटलों, कोचिंग सेंटरों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सख्त कर दिए गए हैं. नियमों के तहत इमारतों में पर्याप्त वेंटिलेशन और आपातकालीन निकासी, बीआईएस मानक अग्निशामक यंत्र, और 15 मीटर से अधिक ऊंचे भवनों के लिए फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य है.
बिना फायर सेफ्टी के कैसे संचालित
शहर में चार दशक से अधिक समय से एमपीनगर सहित अन्य क्षेत्रों में कोचिंग सेंटरों सचालित हो रही हैं. जिसमें पिछले दो दशक में इनकी बाढ़ सी आ गई. वहीं जब बनी हुई बिल्डिगों में कोचिंग सेंटरों का संचालन शुरू किया गया तो फिर इसको संचालन की परमिशन किसने दी. और फिर परमिशन देते समय यहां पर बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के नियमों का पालन क्यों नहीं कराया गया. हालांकि यहां पर भी पहले भी हादसे हो चुके हैं.
छात्रों के जीवन से हो रहा है खिलवाड़
भोपाल में प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी कोचिंग पढऩे के लिए आते हैं. यह कोचिंग, सभी तरह की तैयारियों के लिए संचालित की जाती हैं. शहर में आज लगभग पचास हजार छात्र एैसे हैं जो इन कोचिंंग सेंटरों पर आते हैं. इतने छात्रों के जीवन से यह कोचिंग संचालक खिलवाड़ कर रहे हैं.
प्रशासन की नींद घटना के बाद खुली
भोपाल में प्रशासन की स्थिति एैसी है कि यहां पर पहले से नियमों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है. चाहे वह निर्माण का हो, चाहे कोचिंग सेंटर, पटाखा दुकान या अस्पताल. देश में जब भी किसी भी शहर या राज्य में हादसा होता है उसके बाद भोपाल में प्रशासन जागता है. उसके दूसरे दिन बस फायर सेफ्टी की जांच शुरू हो जाती है. कुछ दिन यह जांच चलती है उसके बाद ठंडे बस्ते में चली जाती है.
पिछले वर्ष भी दिए थे नोटिस
नगर निगम प्रतिवर्ष इस तरह के हादसों के बाद फायर सेफ्टी की जांच का अभियान चलाता है. गत वर्ष भी नगर निगम ने सभी कोचिंग सेंटरों को फायर सेफ्टी को लेकर नोटस दिए थे. उसेक बाद उन नोटिसों का पालन ना ही कोचिंग संचालकों ने किया और ना ही नगर निगम ने इसकी जानकारी ली. उसका नतीजा यह है कि आज भी 90 प्रतिशत कोचिंग सेंटर फायर सेफ्टी के बिना ही संचालित हो रही हैं. जो हादसे निमंत्रण दे सकती है.

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