स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली आएं किसानों से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आत्मीय संवाद

  • अपने प्रदेश-देश में बनी चीज ही खरीदेंगे तो हमारे लाखों-लाख लोगों को रोजगार देने का काम हम ही कर देंगे- शिवराज सिंह
  • ऐसा कोई समझौता नहीं होगा, जो हमारे किसानों के हितों को प्रभावित करे- शिवराज सिंह
  • प्रधानमंत्री जी ने कहा- सरकार फ़ाइलों में नहीं जनता की ज़िंदगी में दिखनी चाहिए, तत्काल दोनों मंत्रालयों के अधिकारियों की बैठक लेकर दिए शिवराज सिंह ने दिए निर्देश
  • रबी की अच्छी फसल के लिए कृषि वैज्ञानिक फिर 3 से 18 अक्टूबर तक गांव-गांव जाएंगे – शिवराज सिंह

नई दिल्ली, 15 अगस्त 2025, स्वतंत्रता दिवस पर भारत सरकार के निमंत्रण पर विशेष अतिथि के रूप में दिल्ली आएं किसानों से आज पूसा परिसर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आत्मीय संवाद हुआ। इस अवसर पर शिवराज सिंह ने किसानों को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर स्वदेशी अपनाने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि हम अपने ही प्रदेश-देश में बनी चीज खरीदेंगे तो हमारे लाखों-लाख लोगों को रोजगार देने का काम हम ही कर देंगे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सभी स्वतंत्रता सेनानियों को प्रणाम किया, जिनके त्याग, तपस्या और बलिदान के कारण भारत स्वतंत्र हुआ था। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने ऐसे ही स्वतंत्रता नहीं दे दी थी, कोई ये न सोचे कि चाँदी की तश्तरी में रखकर हमें आज़ादी भेंट हो गई थी। हज़ारों क्रांतिकारी हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूल गए थे और जब फाँसी के फंदे चूमने जाते थे तो डर से उनके पैर नहीं काँपा करते थे, कलेजा नहीं हिला करता था। उनके एक हाथ में गीता होती थी, उनके मुँह से भारत माता की जय के उद्घोष निकलते थे और उनके हृदय में दृढ़संकल्प होता था। वो भगवान से प्रार्थना करते थे कि हे भगवान, हम मरने के बाद फिर से जन्म इसी भारत भूमि पर लें और तब तक पैदा होते रहें और मरते रहें, जब तक ये देश स्वतंत्र न हो जाए, भारत माता आज़ाद न हो जाए। आज़ादी के दीवाने गाते थे- सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है, वक़्त आने पे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ, हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है।

शिवराज सिंह ने कहा कि हमारी सेना, सेना के वीर सैनिक जिन्होंने ऐसे शौर्य का प्रदर्शन किया, आज आपने देखा प्रधानमंत्री जी ने ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा की, हम किसी को छेड़ते नहीं हैं लेकिन अगर कोई हमें छेड़ता है तो उसे हम छोड़ते नहीं हैं। जिन आतंकवादियों ने हमारे निर्दोष 26 भाइयों को मारा था और उनके परिवारों ने कहा था कि सिर पर ही गोली मारना चाहिए, सिर पर गोली मारकर ढेर कर दिया उन आतंकवादियों को ऑपरेशन महादेव के तहत और जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया ऐसे हमारे वीर सिपाहियों को हम बारंबार प्रणाम करते हैं, हम यहां चेन से इसलिए बैठे हैं कि वो दिन और रात सीमाओं पर रहकर सुरक्षा करते हैं।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वदेशी का मतलब है अपने देश में बनी हुई चीज। बाहर से आई कोई चीज़ इंपोर्टेड, सीना फूल रहा है लेकिन कभी सोचा है जो चीज़ बाहर से आती है वो चीज़ हमारे देश का पैसा विदेशों में ले जाती है। वहाँ रोज़गार बढ़ते हैं, अर्थव्यवस्था उनकी मज़बूत होती है। प्रधानमंत्री जी ने भाव भरे शब्दों में कहा है स्वदेशी का इस्तेमाल करो। अगर हमारे गांव के आस-पास बनी, गांव में बनी, सेल्फ हेल्प ग्रुप की जो चीजें हमारी बहनें बनाती हैं वो, अपने जिले, अपने प्रदेश, अपने देश में बनी चीज खरीदेंगे तो हमारे लाखों-लाख लोगों को रोजगार देने का काम हम ही कर देंगे। हमारे कुम्हार के दीये खरीदकर दिवाली का दिया जलाएंगे तो उसका घर भी रोशन हो जाएगा रोजगार से और इसलिए प्रधानमंत्री जी ने अपील की है।

शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने कितनी बड़ी बात कही है, किसानों का हित सर्वोपरि, राष्ट्र का हित सर्वोपरि, आपको पता है दुनिया में कई लोग हमारी प्रगति से जलते भी हैं कि भारत ज्यादा आगे नहीं बढ़ जाए। हम दुनिया को परिवार मानते हैं “वसुधैव कुटुंबकम” का भाव हमारे मन में है, यह समझौता होता है बराबरी का, यूके से हमने समझौता किया बराबरी का, हमारे देश के किसान भाइयों बिना ड्यूटी के टैक्स के हमारे कृषि उत्पाद ल, कई चीजें अब इंग्लैंड जाएंगी। यह समझौता किया बिना टैक्स के जाएंगी लेकिन कोई यह कहे कि समझौता ऐसा हो जाए जिससे उनके देश का सामान हमारे यहां भर जाए, मक्का आ जाए, सोयाबीन आ जाए, गेहूं आ जाए तो हमारा और उनका कोई मुकाबला नहीं है, उनके यहां बड़े बड़े कृषि फार्म 10 हजार, 15 हजार, 20 हजार हेक्टर के और हमारे यहां एक एकड़, दो एकड़, 3 एकड़, 5 एकड़, 5 वाले तो बहुत ही कम बचे हैं कोई मुकाबला है क्या… और यह समझौता ऐसा कोई हो जाता तो भारत का किसान मर जाता, सस्ती चीजों की बाढ़ लग जाती। हमारा सामान सस्ता बिकता तो लागत नहीं निकलती कीमतें गिर जाती और इसलिए किसान भाइयों कृषि मंत्री होने के नाते मैं आप सबकी तरफ से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कह दिया कोई समझौता नहीं है ऐसा जो किसान के हितों के खिलाफ जाएगा, कृषि विभाग ने ताकत के साथ अपनी बात रखी कि कोई ऐसा समझौता नहीं है जो हमारे किसान के हितों को प्रभावित करे, हमारे किसान, हमारे पशुपालक, भैंस, गाय पालने वाले, हमारे मछुआरे उनके हित सर्वतः सुरक्षित रखे जाएंगे। राष्ट्रहित सर्वोपरि, भारत माता सबसे पहले, राष्ट्र प्रथम बाद में और कोई।

शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने एक बात आज और कही, सरकार फ़ाइलों में नहीं जनता की ज़िंदगी में दिखनी चाहिए। आज मैं बैठा था, अभी पहले ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के साथ मैंने मीटिंग की, अभी कृषि विभाग के दोनों प्रमुखों के साथ अभी बात कर रहा था, विभाग के साथ अभी फिर मीटिंग करूंगा। फ़ाइल में नहीं, ज़िंदगी में दिखने का मतलब क्या है? खाद आ रहा है लेकिन किसान तक ठीक से जा रहा है या नहीं? मैं कल अपने क्षेत्र में गया था, किसानों ने बताया कि एक दवाई डाली और फसल ही जल गई। दवाई थी खरपतवार जलाना था, फसल जल गई। तब तय किया कि FIR करें और मैंने तत्काल यहाँ भेजा, ऐसा कंपनी का पता लगाकर इस कंपनी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए। हर योजना का लाभ ढंग से कैसे किसान को मिले, कैसे किसान तक पहुँचे।

उन्होंने कहा कि सरकार जनता की लाइफ़ में दिखे, इसलिए हमारे कृषि वैज्ञानिक पहली बार गाँव-गाँव गए, किसानों के बीच लैब को लैंड तक पहुँचाया, ताकि किसान और विज्ञान मिलकर कैसे अच्छा उत्पादन करें, उसके लिए साथ मिलकर काम कर सकें। अभी फिर निकलने वाले हैं, 3 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक। शिवराज सिंह ने बताया कि हम रबी की फसल के लिए कॉन्फ़्रेंस 2 दिन की करने वाले हैं ताकि जनता की ज़िंदगी बदल सकें। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और किसान उसकी आत्मा, अगर मैं कृषि मंत्री हूँ तो मैं ये मानता हूँ कि किसानों की सेवा मेरे लिए भगवान की पूजा है।

कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी, ICAR के महानिदेशक डॉ एम.एल. जाट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। संयुक्त सचिव श्रीमती पेरिन देवी ने आभार माना।

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