नरसिंहगढ़। प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. मोहिका सक्सेना ने अपनी उत्कृष्ट एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों से उपस्थित कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया. मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध भरतनाट्यम कलाकार डॉ. मोहिका सक्सेना ने मात्र तीन वर्ष की आयु से विधिवत भरतनाट्यम की शिक्षा प्रारंभ की थी. लगभग तेईस वर्षों की सतत साधना के दौरान उन्होंने भारत भवन, सांची महोत्सव, ताज महोत्सव (आगरा) सहित अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं.
वर्ष 2020 में वे खजुराहो डांस फेस्टिवल के मंदिर परिसर में प्रस्तुति देने वाली सबसे युवा नृत्यांगना रहीं. वे दूरदर्शन की बी-ग्रेड कलाकार हैं तथा वर्ष 2022 में उन्हें सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), नई दिल्ली द्वारा भरतनाट्यम विधा में यंग आर्टिस्ट स्कॉलरशिप से सम्मानित किया गया. चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने भरतनाट्यम की साधना को पूर्ण समर्पण एवं लगन के साथ निरंतर जारी रखा है.
कार्यक्रम में डॉ. मोहिका सक्सेना ने अपनी प्रस्तुतियों का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना जयति वीणा वादिनि से किया. भावपूर्ण अभिनय एवं सटीक नृत्य मुद्राओं के माध्यम से उन्होंने ज्ञान, कला और विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की आराधना प्रस्तुत की.
इसके पश्चात उनकी दूसरी प्रस्तुति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ के प्रसिद्ध काव्यांश बादल राग पर आधारित रही. इस प्रस्तुति में नृत्यांगना ने उमड़ते-घुमड़ते काले बादलों, उनकी गर्जना, आपसी टकराव तथा प्रकृति में उत्पन्न होने वाले उन्माद का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण किया.
अपनी भाव-भंगिमाओं के माध्यम से उन्होंने बादलों का आह्वान कर उन्हें नवजीवन के संचार का माध्यम बताया. वर्षा के काले मेघों, तीव्र वेग से बहते नदी-नालों तथा प्रकृति में मची हलचल का सजीव मंचन दर्शकों को भाव-विभोर कर गया. ताल मालिका एवं राग खण्डचापु में निबद्ध इस प्रस्तुति के बोल थे— झूम-झूम मृदु गरज-गरज घन घोर! राग-अमर! अंबर में भर निज रोर! कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति योग पर आधारित शिव स्तुति रही. डॉ. मोहिका सक्सेना ने भारतीय परंपरा में भगवान शिव को ‘आदि योगी’ के रूप में प्रस्तुत करते हुए योग और शिव के गहन संबंध को अभिव्यक्त किया.
अपनी सशक्त भाव-भंगिमाओं एवं भरतनाट्यम की विविध मुद्राओं के माध्यम से उन्होंने शिव की ध्यानमग्न योग मुद्रा को आत्मज्ञान और परम चेतना का प्रतीक दर्शाया. प्रस्तुति में आत्मा के परमात्मा से मिलन तथा योग को शिव तक पहुँचने के मार्ग के रूप में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया. राग मालिका एवं ताल आदि में निबद्ध इस रचना ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया. डॉ. मोहिका सक्सेना की सभी प्रस्तुतियों ने उपस्थित कला प्रेमियों का मन मोह लिया. भारी संख्या में उपस्थित दर्शकों ड्ढद्ध ने तालियों की गडग़ड़ाहट से विद्यालय परिसर को रोमांच, उत्साह एवं ऊर्जा से भर दिया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुशील कुमार एसडीएम नरसिंहगढ़ रहे.
