सतना: जिले में निजी इंटरनेट प्रदाता कंपनियों की मनमानी और लापरवाही आम जनता के साथ-साथ बिजली विभाग के लिए भी बड़ा सिरदर्द बन चुकी है। शहर से लेकर कस्बों तक, बिजली के खंभों पर अवैध रूप से दौड़ाए जा रहे इंटरनेट और केबल टीवी के तारों के कारण आए दिन शॉर्ट-सर्किट और आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं। स्थिति यह है कि बिजली के पोल अब बिजली की कम और इंटरनेट के तारों के जाल ज्यादा नजर आते हैं। घनी आबादी वाले इलाकों में इन लटकते तारों की वजह से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इंटरनेट कंपनियां रात के अंधेरे में या बिना किसी अनुमति के बिजली के खंभों पर अपने फाइबर ऑप्टिक केबल बांध देती हैं.कई जगहों पर ये तार बिजली के मुख्य हाई-टेंशन और लो-टेंशन तारों से सीधे रगड़ खाते हैं.तेज हवा चलने या गर्मी बढ़ने पर इनमें घर्षण होता है, जिससे जोरदार स्पार्किंग होती है और खंभों पर प्लास्टिक के तारों के गुच्छे धू-धू कर जलने लगते हैं.हाल ही में मुख्य बाजार के एक बिजली पोल में इंटरनेट के तारों के कारण भीषण आग लग गई थी, जिससे पूरे इलाके की आपूर्ति कई घंटों तक ठप रही.गनीमत रही कि आग पास की दुकानों तक नहीं फैली, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी।
इस अवैध कारोबार से बिजली विभाग को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। एक तरफ इंटरनेट कंपनियां सरकारी बुनियादी ढांचे का मुफ्त में इस्तेमाल कर राजस्व की चपत लगा रही हैं, तो दूसरी तरफ इनके कारण होने वाले शॉर्ट-सर्किट से विभाग के इंसुलेटर, जंपर्स और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इनकी मरम्मत में विभाग को हर महीने लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि हल्की आंधी या बारिश होते ही इन तारों में चिंगारियां निकलने लगती हैं, जिससे घरों के उपकरण फुंकने का डर बना रहता है।
नियमानुसार, बिजली के खंभों पर किसी भी अन्य प्रकार के तार खींचने से पहले विद्युत विभाग से लिखित अनुमति और निर्धारित शुल्क देना अनिवार्य है.इसके बावजूद जिले में धड़ल्ले से चल रहे इस खेल पर बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सख्त नजर नहीं आ रहा है.कभी-कभार विभाग द्वारा तार काटने की दिखावे की कार्रवाई की जाती है, लेकिन कंपनियां कुछ ही दिनों बाद दोबारा वहीं तार जोड़कर सक्रिय हो जाती हैं।
