जबलपुर: म्यूल अकाउंट्स के जरिए करोड़ों की ठगी की रकम को खपाया गया है। पुलिस ने करीब ऐसे डेढ़ हजार खाते चिन्हित कर लिए है जिसमें अनाधिकृत ट्रांजेक्शन के तार जुड़ रहे है। इनमें से पांच सौ खातों का लेखा जोखा समेत ट्रांजेक्शन का ब्यौरा भी पुलिस के पास पहुंच गया है जिसकी तफ्तीश की जा रही है। साथ ही साइबर ठगों के मद्दगारों पर शिकंजा कसने के साथ उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। म्यूल अकाउंट्स के जरिए डिजिटल अरेस्ट, टास्क फ्रॉॅड और ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली ठगी की रकम को खपाया गया है।
खंगाली जा रही कुंडली
उप पुलिस अधीक्षक साइबर अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया कि ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत जबलपुर जिले के कई अन्य बैंक खातों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। साइबर सेल की टीमें इन खातों के ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और इनके धारकों की कुंडली खंगाल जा रही हैं। 1500 खाते खातें चिन्हित किए गए है। खातों ट्रांजेक्शन खंगाले के साथ अन्य बिन्दुओं पर जांच चल रही है। पुलिस के मुताबिक जिन भी म्युल खातों की साइबर फ्रॉड में संलिप्तता पाई जाएगी, उनके खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ गिरफ्तारी की जायेगी।
अंतरराष्ट्रीय ठिकानों से जुड़े है ठिकानों के तार
ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा रहा है। युवाओं, मजदूरों और बेरोजगारों को लालच देकर उनके नाम पर फर्जी म्यूल खाते खोले गए है। जिनका उपयोग साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर किया गया है। इन फर्जी खातों के तार अफ्रीकी देशों सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय ठिकानों से जुड़े हुए है।
ऐसे खुलवाते है खातें
पुलिस की अब तक की जांच में यह बात सामने आई कि जालसाज बेरोजगार, छात्रों या जरूरतमंदों को कमीशन, मोटी कमाई का लालच देते है। इसके बाद खाता खुलवाया जाता है और इन्हें उनके एजेंट आगे बेच देते है जिसके बाद साइबर ठगी की रकम सीधे इन म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर होती है।
