इंदौर: शहर के प्रमुख व्यावसायिक और ऐतिहासिक क्षेत्र राजवाड़ा में यातायात व्यवस्था सुधारने के दावों की पोल एक बार फिर खुलती नजर आ रही है. यातायात अभियान और विभागीय दावों के बावजूद राजवाड़ा क्षेत्र में अवैध ई-रिक्शा संचालन और जाम की समस्या पहले जैसी ही बनी हुई है.राजवाड़ा के एक हिस्से में ई-रिक्शा चालकों ने खुलेआम अवैध स्टैंड बना लिया है. हालात ऐसे हैं कि सड़क तक ई-रिक्शा खड़े कर सवारियां भरी जा रही हैं, जिससे दिनभर यातायात प्रभावित हो रहा है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब प्रशासन और यातायात विभाग की नजरों के सामने हो रहा है, लेकिन कार्रवाई नदारद है.
वहीं, दूसरी ओर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया राजवाड़ा शाखा के सामने कई ट्रैफिक पुलिसकर्मी एक साथ चालानी कार्रवाई में व्यस्त दिखाई देते हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग का पूरा ध्यान राजस्व बढ़ाने वाले चालानों पर है, जबकि जाम जैसी मूल समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है. कुछ माह पहले ट्रैफिक विभाग ने बड़े स्तर पर अभियान चलाकर राजवाड़ा सर्कल से ई-रिक्शाओं को हटाने की कार्रवाई की थी. उस समय व्यवस्था सुधारने के दावे किए गए और विभाग ने इसकी सफलता का व्यापक प्रचार भी किया. लेकिन अब स्थिति देखकर सवाल उठ रहे हैं कि वह अभियान केवल दिखावा था या फिर कार्रवाई के बाद निगरानी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो गई.
कलर कोड व्यवस्था केवल कागजों तक
ई-रिक्शाओं के लिए लागू की गई कलर कोड व्यवस्था भी कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है. न तो चालक निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं और न ही विभाग उल्लंघन करने वालों पर कोई सख्त कदम उठा रहा है. परिणामस्वरूप नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं और आम जनता जाम की समस्या से जूझने को मजबूर है.
समय रहते कार्रवाई नहीं तो बिगड़ेगी व्यवस्था
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि ट्रैफिक विभाग ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो राजवाड़ा क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है. नागरिकों का सवाल है कि जब अभियान के दौरान व्यवस्था बनाई जा सकती थी, तो उसे बनाए रखने में विभाग क्यों असफल साबित हो रहा है? अब बड़ा सवाल यह है कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के नाम पर चलाए गए अभियान केवल वाहवाही बटोरने तक सीमित थे या फिर विभाग वास्तव में राजवाड़ा को जाम और अव्यवस्था से मुक्त कराने के लिए गंभीर है.
