सुदृढ़ सैन्य तैयारी के लिए तकनीकी चुस्ती, रणनीतिक दूरदृष्टि और संस्थागत नवाचार जरूरी: राजनाथ

नयी दिल्ली 20 जून (वार्ता) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था की अनिश्चितताओं के बीच सुदृढ़ सैन्य तैयारी बनाए रखने के लिए तकनीकी चुस्ती, रणनीतिक दूरदृष्टि और संस्थागत नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया है।

श्री सिंह ने शनिवार को मेघालय के शिलांग स्थित पूर्वी वायु कमान मुख्यालय में सैनिकों को संबोधित करते हुए जोर देकर कहा कि अपनी शर्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही कुंजी है। साथ ही उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवादियों को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध की निरंतर बदलती प्रकृति में मिश्रित खतरे, साइबर चुनौतियाँ, सूचना युद्ध, रसद लचीलापन, आपूर्ति शृंखला सुरक्षा और ड्रोन अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व बनकर उभर रहे हैं। ऐसी स्थिति में केवल पारंपरिक तैयारी ही सशस्त्र बलों के लिए पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को अपनी शर्तों पर सुनिश्चित करने के लिए भारत के आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता को दोहराया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए किए गए प्रयासों के कारण ऑपरेशन सिंदूर एक ऐतिहासिक सफलता सिद्ध हुआ। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से हमने आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को यह संदेश दिया है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। हमारे सशस्त्र बलों की क्षमता, सतर्कता और दृढ़ संकल्प ने एक बार फिर विश्व के सामने भारत की बढ़ती शक्ति को प्रदर्शित किया है। पूर्वी वायु कमान जैसी संरचनाएँ इस व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि की सक्रिय भागीदार बनकर उभरी हैं।”

रक्षा मंत्री ने पूर्वी वायु कमान को भारत की पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में इसकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, “चाहे युद्धक्षेत्र हो, शांतिकालीन तैनाती, आपदा प्रबंधन, उच्च हिमालयी अभियान या सीमा प्रबंधन, पूर्वी वायु कमान ने हर परिस्थिति में पेशेवर दक्षता, साहस और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है।”

श्री सिंह ने कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने वाले सैनिकों की प्रशंसा की। पूर्वी वायु कमान के कार्यक्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा, समृद्धि और रणनीतिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का प्रमुख अंग है। उन्होंने कहा, “आज जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को और सशक्त बना रहा है, तब पूर्वोत्तर का महत्व और भी बढ़ गया है।”

इस अवसर पर वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह, पूर्वी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया तथा वायु सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रक्षा मंत्री इस वर्ष पूर्वी वायु कमान मुख्यालय में सैनिकों के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 मनाएंगे।

 

 

 

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