
इंदौर. तेजाजीनगर पुलिस ने संपत्ति संबंधी अपराधों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए गैस टंकी चोरी करने वाली शातिर गैंग का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 34 गैस टंकियां, 6 बड़ी वाहन बैटरियां और वारदात में इस्तेमाल 2 दुपहिया वाहन जब्त किए हैं. जब्त माल की कीमत करीब 4.25 लाख रुपए बताई जा रही है.
कार्रवाई 10 जून को माउंट बर्ग कॉलोनी स्थित फार्म हाउस से गैस टंकियां चोरी होने की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई. फरियादी की शिकायत पर मामला दर्ज कर पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और संदिग्धों की पहचान की. इसके बाद घेराबंदी कर चारों आरोपियों को पकड़ लिया. पूछताछ में सामने आया कि गिरोह लंबे समय से शहर के अलग अलग थाना क्षेत्रों में सक्रिय था. आरोपियों ने राऊ, आजादनगर, खजराना, विजयनगर, कनाड़िया और पीथमपुर क्षेत्र में वारदात करना कबूल किया है. हाल ही में राऊ क्षेत्र से 4 और आजादनगर से 2 गैस टंकियां चोरी करने की बात भी सामने आई है. थाना प्रभारी देवेन्द्र मरकाम ने बताया कि गिरोह का सरगना आनंद मांडले भंवरकुआ क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर पहले से कई नकबजनी के मामले दर्ज हैं। गिरोह के अन्य सदस्य भी आपराधिक प्रवृत्ति के हैं. डीसीपी जोन 1 नरेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि शहर में संपत्ति संबंधी अपराधों पर नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. इसी कड़ी में यह कार्रवाई की गई है. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में अन्य वारदातों की जानकारी भी मिली है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है. पूरी कार्रवाई पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मयंक अवस्थी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी देवेंद्र मरकाम की टीम ने की.
आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड…
आनंद मांडले पर भंवरकुआ व किल्लौद थानों में चोरी, नकबजनी और अन्य धाराओं में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. जबकि सौरभ कैथवास पर आबकारी एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के प्रकरण दर्ज हैं. वहीं अनिकेत उर्फ अमन पर हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं.
राहुल पाटीदार पर भी विभिन्न थानों में चोरी और नकबजनी के केस दर्ज हैं.
बॉक्स…
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम…
गिरोह के सदस्य दुपहिया वाहनों से दिन में अलग-अलग इलाकों में घूमकर सूने मकानों की रेकी करते थे. ताला लगे घरों को निशाना बनाकर दिनदहाड़े ही ताले तोड़कर अंदर घुस जाते और गैस टंकियां उठाकर फरार हो जाते थे. गिरोह के दो सदस्य पहले गैस एजेंसी में काम कर चुके थे, इसलिए चोरी की टंकियों को आसानी से ठिकाने लगा देते थे.
