लिंडसे ग्राहम ने चेताया- अमेरिका-ईरान समझौते की ‘अलग-अलग व्याख्याएं’ संभव, वांस से की संसद की समीक्षा के लिए भेजने की मांग

वॉशिंगटन, 15 जून (वार्ता) अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अमेरिका-ईरान के बीच नये घोषित समझौते को लेकर शुरुआती चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि दोनों देश समझौते की मुख्य शर्तों पर एकमत नहीं हैं। इस समझौते की पारदर्शिता और इसे लागू कराने की क्षमता पर बढ़ते सवालों के बीच श्री ग्राहम ने संसदीय समीक्षा की मांग की है। उनका इस बात पर जोर है कि 19 जून को हस्ताक्षर होने के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वांस के नेतृत्व वाली टीम को इस समझौते को समीक्षा के लिए सांसदों के सामने पेश करना चाहिए। श्री ग्राहम ने कहा कि वह इस बात को लेकर ‘चिंतित’ हैं कि हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए समझौते को लेकर अमेरिका-ईरान की व्याख्याएं अलग-अलग दिखाई दे रही हैं।

ईरान के प्रति कड़ा रुख रखने वाले श्री ग्राहम ने ‘एक्स’ पर लिखा, “मुझे यह सुनकर खुशी हुई कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अनुमति देने के लिए ईरान के साथ सहमति बन गयी है। मैं ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य मामलों से जुड़ी आगामी वार्ताओं पर बारीकी से नजर रखूंगा। मैं इस बात को लेकर थोड़ा चिंतित हूं कि इस समझौते पर ईरान का नजरिया अमेरिकी वार्ता दल के दावों से अलग दिख रहा है।” श्री ग्राहम ने कहा कि अमेरिकी कानून के तहत, ईरान के साथ किसी भी परमाणु समझौते को समीक्षा और मतदान के लिए संसद (कांग्रेस) के सामने पेश किया जाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते के मुख्य सूत्रधार उपराष्ट्रपति वांस और उनके वार्ता दल को इस समझौते को सांसदों के सामने पेश करने में मुख्य भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा, “हमारे कानून के तहत ईरान के साथ कोई भी परमाणु समझौता समीक्षा और मतदान के लिए संसद को भेजा जायेगा। मैं इस अंतिम दस्तावेज की समीक्षा करने के लिए उत्सुक हूं। मेरा मानना है कि इस समझौते के सूत्रधार उपराष्ट्रपति वांस और उनके वार्ता सहयोगियों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे अंतिम समझौते को कांग्रेस के सामने पेश करने की इस प्रक्रिया का हिस्सा बनें।” सीनेटर ने इस चरण तक पहुंचने में शामिल लोगों को बधाई देते हुए आगाह भी किया कि इस समझौते का अंतिम प्रभाव क्या रहेगा, यह तो वक्त ही बतायेगा। गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को इस समझौते की घोषणा की, जो ईरान से साढ़े तीन महीने से चले आ रहे संघर्ष की संभावित समाप्ति का संकेत है। श्री ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट में लिखा, “इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है।

सभी को बधाई! समझौते के तहत मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने की पूरी अनुमति देता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का आदेश देता हूं। दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन शुरू करो। तेल को बहने दो!” संघर्ष के शुरुआती चरणों से ही ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले जहाजों के आवागमन को सीमित कर दिया था, जिसके चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता पैदा हुई और अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ गयीं। ईरान के इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद किये जाने के जवाब में अमेरिका ने अप्रैल के मध्य में ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी कर दी थी। पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और तुर्की की मध्यस्थता के प्रयासों के बाद हुए इस समझौते पर 19 जून को जिनेवा में आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि हस्ताक्षर समारोह से पहले पूरे हफ्ते बातचीत जारी रहेगी।

इसी बीच अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह होना तय हुआ है। उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने रविवार को फॉक्स न्यूज से कहा कि वे इस समारोह के लिए स्विट्जरलैंड जाने की योजना बना रहे हैं और यह ‘संभव’ है कि श्री ट्रम्प भी इसमें शामिल हों। अमेरिकी संसद के समीक्षा किये जाने की इस संभावना की तुलना ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन’ (जेसीपीओए) से की जा रही है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए ओबामा कार्यकाल के दौरान ईरान और वैश्विक शक्तियों के बीच हुआ समझौता था। जेसीपीओए को एक राजनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में तैयार किया गया था और यह कोई संधि नहीं थी, इसलिए इसके लिए सीनेट की मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी।

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