विदिशा से देश की खेती बदलने का संकल्प: शिवराज ने लगाई किसानों की पाठशाला

विदिशा: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा के बेरखेड़ी जट्टू में किसानों की एक अनूठी ‘पाठशाला’ लगाकर देश में खेती की दशा और दिशा बदलने का एक बड़ा संकल्प सामने रखा। इस कार्यक्रम में पारंपरिक मंचीय औपचारिकताओं और लंबे स्वागत भाषणों की जगह पूरा ध्यान सीधे खेत और किसान की समस्याओं पर केंद्रित रहा। यहाँ विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए वैज्ञानिक खेती का रोडमैप, ‘खेत बचाओ अभियान’ और आधुनिक मशीनरी की नई श्रृंखला लॉन्च की गई।
सहज और बोलचाल की भाषा में संवाद करते हुए केंद्रीय मंत्री ने साफ कहा कि यह कोई राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि खेती की कक्षा है, जहाँ ढाई एकड़ जमीन वाले छोटे और सीमांत किसानों को भी सम्मानजनक आजीविका दिलाने का लक्ष्य है।बेरखेड़ी जट्टू में बनने वाला यह कृषि विज्ञान केंद्र 49 एकड़ जमीन पर देश का पहला मॉडल केंद्र होगा। श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक बिल्डिंग के निर्माण का इंतजार किए बिना इसी खरीफ सीजन से खेतों में प्रदर्शन प्लॉटों पर काम तुरंत शुरू होगा। इस केंद्र के माध्यम से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 113 संस्थानों और देश भर के 1700 से अधिक केवीके के नेटवर्क की रिसर्च को सीधे मोबाइल, लाइव डेमो और ट्रेनिंग के जरिए विदिशा-अंचल के किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लगातार होते विभाजनों के कारण किसानों की जमीनें छोटी हो गई हैं, लेकिन ढाई एकड़ (एक हेक्टेयर) में भी यदि एकीकृत कृषि को सही तरीके से अपनाया जाए, तो पूरे परिवार की आजीविका आराम से चल सकती है। इसके लिए चारों जिलों (विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास) की मिट्टी और पानी का वैज्ञानिक विश्लेषण कर फसल-पद्धति का रोडमैप तैयार किया गया है। मॉडल फार्म के जरिए दिखाया जाएगा कि एक ही खेत में अनाज, दलहन, बागवानी के साथ पशुपालन, मछली-पालन, मधुमक्खी-पालन और मशरूम उत्पादन जोड़कर कैसे अधिकतम लाभ कमाया जा सकता है।

राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का विस्तार करते हुए श्री चौहान ने अंधाधुंध रासायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग से धरती की उर्वरा शक्ति के हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने घोषणा की कि:हर खेत की मिट्टी की जांच और ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ अभियान को तेज किया जाएगा। किसानों से कम से कम आधा एकड़ में वैज्ञानिक तरीके से प्राकृतिक या जैविक खेती की शुरुआत करने की अपील की गई। मॉडल केवीके में एक ‘एग्री क्लीनिक’ (फसल का अस्पताल) बनाया जाएगा, जहाँ वैज्ञानिक पौधों और मिट्टी के नमूनों की जांच कर तुरंत बीमारी का उपचार बताएंगे। किसानों की सहायता के लिए ‘भारत विस्तार-किसान सारथी’ हेल्पलाइन नंबर 155261 और एक विशेष मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है, जिसके जरिए किसान खेत से ही खाद की सही मात्रा और फसल रोगों का समाधान जान सकेंगे।

किसानों को नकली कृषि इनपुट से बचाने के लिए सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए मंत्री ने कहा कि धोखाधड़ी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने किसानों से पक्का बिल लेने और क्यूआर कोड से प्रामाणिकता जांचने की अपील की। इसके अलावा, छोटे किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीन बैंक की घोषणा की गई, जहाँ लेज़र लेवलर, डायरेक्ट सीडेड राइस मशीन और ड्रिप-स्प्रिंकलर जैसी महँगी आधुनिक मशीनें नाममात्र के किराए पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

कृषि मंत्री ने कहा कि केवल कच्चा माल बेचने से किसानों को नुकसान होता है, इसलिए यहाँ फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की ट्रेनिंग देकर युवाओं को कृषि-आधारित स्टार्टअप से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ को तेज किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसान जितना भी दलहन (तुअर, उड़द और मसूर) पैदा करेंगे, उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। साथ ही, जहाँ उत्पादन अधिक होगा, वहाँ दाल मिल लगाने के लिए 25 लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी।इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना, राजस्व मंत्री करण सिंह, स्थानीय विधायक, जनप्रतिनिधियों सहित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट, सीआईआई के सिद्धार्थ चतुर्वेदी और देश के जाने-माने कृषि वैज्ञानिक व विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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