
बालाघाट, देसी लोक नाटक, डंढार और संस्कृति से जुड़े कलाकार आर्थिक, मानसिक और शारीरिक संकट से जूझ रहे हैं। शासकीय योजनाओं और पेंशन का लाभ न मिलने से नाराज कलाकारों ने रविवार को नूतन कला निकेतन में आयोजित महाकौशल कलाकार शायर मंडल के स्थापना दिवस पर अपनी पीड़ा रखी।
मंडल अध्यक्ष गौरीशंकर मोहारे ने बताया कि संगठन के 6 साल पूरे हो गए, लेकिन एक भी मांग पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह इन कलाकारों को भी शासन से योजनाओं का लाभ और व्यक्तिगत पेंशन दी जाए। साथ ही सांस्कृतिक कला विभाग के जरिए बड़े शहरों में इनकी कला का प्रदर्शन कराया जाए।
मोहारे ने कहा, “हम कलाकार गांव-गांव स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का प्रचार करते हैं। शासन के कोई भी कार्यक्रम कलाकारों के बिना पूरे नहीं होते, फिर भी हमेशा उपेक्षा की जाती है। आज तक किसी शासकीय योजना का लाभ नहीं मिला।”
स्थापना दिवस पर हुई बैठक में सर्वसम्मति से मानदेय की मांग शासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं के साथ एकता जरूरी है। शिक्षा, संस्कार और आपसी सहयोग से ही समाज मजबूत होगा।
कार्यक्रम में बालाघाट, सिवनी, जबलपुर, डिंडोरी, गोंदिया महाराष्ट्र और महाकौशल के विभिन्न जिलों से आए शायर, डंढार कलाकार और गायकों ने गीत-संगीत की प्रस्तुति दी। अध्यक्ष मोहारे के नेतृत्व में कलाकारों ने अपनी आवाज बुलंद करने का संकल्प लिया।
