नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में ‘सुपर अल-नीनो’ के गंभीर खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है। प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि से उत्पन्न यह मौसमी घटना भारत के लिए जान-माल के बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। पीएम ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस संकट से निपटने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है।
क्या है सुपर अल-नीनो और इसका प्रभाव?
सुपर अल-नीनो तब होता है जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म हो जाता है, जो वैश्विक मौसम चक्र को पूरी तरह बिगाड़ देता है। भारत में इसके प्रभाव से मानसून के कमजोर होने और बारिश में 10 फीसदी तक की कमी आने की आशंका है। इससे उत्तर भारतीय राज्यों में भीषण गर्मी और लू की स्थिति और अधिक गंभीर होने का खतरा है।
बचाव और तैयारियों पर जोर
इस प्राकृतिक आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने जल संरक्षण, कम पानी वाली फसलों की खेती और व्यापक जन-जागरूकता को प्राथमिकता दी है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक सलाह के अनुसार बुआई करने की सलाह दी है। इसके साथ ही, आम जनता को भीषण गर्मी से बचने के लिए हाइड्रेटेड रहने और आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

