सीहोर। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर बालागुरू के. लगातार सख्त निर्देश जारी कर रहे हैं. टीएल बैठक में भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि उपार्जन कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके बावजूद सीहोर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम दुरगांव स्थित रावत वेयर हाउस में गड़बड़ी सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं.
वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन की जांच में रावत वेयर हाउस के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसमें निर्धारित रिकॉर्ड के मुकाबले 284 गेहूं की बोरियां कम पाई गईं. यह मामला तब सामने आया जब खरीदी और तुलाई की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी वेयर हाउस परिसर में संदिग्ध गतिविधियां जारी रहने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए. वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच समिति गठित कर मामले की जांच कराई.
इस घटना ने उपार्जन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. नियमों के अनुसार खरीदी पूर्ण होने के बाद वेयर हाउस का स्टॉक फ्रीज कर दिया जाता है और चाबियां वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के नियंत्रण में रहती हैं. ऐसे में सवाल यह है कि प्रतिबंधित अवधि में वेयर हाउस का ताला किसकी अनुमति से खोला गया और रात के समय निजी वाहन परिसर में आखिर कैसे प्रवेश करते रहे.
प्रभारी शाखा प्रबंधक वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन एएल सूर्यवंशी ने बताया ग्राम दुरगांव स्थित रावत वेयर हाउस में जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आई हैं। खरीदी बंद होने के बाद भी वहां गतिविधियां जारी थीं। जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों एवं कलेक्टर को सौंप दी गई है. वहीं उपार्जन अधिकारी आकाश चंदेल ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर गठित जांच दल ने पड़ताल की, जिसमें गड़बड़ी की पुष्टि हुई है. रावत वेयर हाउस संचालक सहित संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
रात के अंधेरे में हो रही थीं बोरियां शिफ्ट
पूरा मामला करीब 1500 गेहूं की बोरियों के संभावित फर्जीवाड़े से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि खरीदी बंद होने के बाद भी रात के समय वेयर हाउस में गेहूं की बोरियां चोरी-छिपे पहुंचाई और शिफ्ट की जा रही थीं. बताया जा रहा है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर को छिपाने के उद्देश्य से यह कवायद की जा रही थी. हालांकि जांच के दौरान ही 284 बोरियां कम मिलने से पूरे मामले की परतें खुलने लगी हैं.
प्र्रभावशालियों को जिम्मेदार दे रहे स्पेशल ट्रीटमेंट
रावत वेयरहाउस मामले को लेकर जिले के अन्य वेयर हाउस संचालकों में भी नाराजगी देखी जा रही है. उनका आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों को नियमों से परे जाकर विशेष सुविधा दी जा रही है. संचालकों का कहना है कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे.
