महामानव की मूर्ति स्थापना के विरोध के पीछे की शिवगामी देवी कौन: श्यामवती

सीधी। प्रतिमा विवाद ने तूल पकड़ लिया है, आदिवासी नेत्री ने पूर्व मंत्री की प्रतिमा स्थापना में सत्ता के दबाव में प्रशासनिक उदासीनता और कार्यवाही को लेकर सवाल खड़े किये है।

जनपद पंचायत कुसमी अध्यक्ष श्रीमती श्यामवती सिंह ने कहा है कि सीधी ही नही समूचे प्रदेश का सर्वहारा वर्ग और सर्व समाज यह जानना चाहता है कि आखिरकार एक महामानव राजनीतिक संत की मूर्ति स्थापना के विरोध की कलुषित मानसिकता रखने वाले भाजपा के कौन से नेता या जनप्रतिनिधि हैं। उनके चेहरे बेनकाब होने चाहिए क्योंकि वास्तविक रूप से यह मूर्ति स्थापना का विरोध नहीं बल्कि उन वर्गों का विरोध माना जाएगा जिनके आंसू पोंछने के लिए मानव सेवा से पुरस्कृत पूर्व मंत्री स्व.इन्द्रजीत कुमार ने अपना समूचा जीवन समर्पित कर दिया। आखिरकार जनता को यह जानने का हक है कि इस बाहुबली प्रशासनिक विरोध और षड्यंत्र के पीछे मेरा वचन ही है शासन की सोच रखने वाली शिवगामी देवी कौन है? जारी प्रेस विज्ञप्ति में जनपद पंचायत कुसमी अध्यक्ष श्रीमती श्यामवती सिंह ने आगे कहा कि स्वर्गीय इंद्रजीत कुमार एक राजनेता या जन नेता ही नहीं वरन मानव सेवा से पुरस्कृत राजनीतिक संत थे। विंध्य विभूति और गांधीवादी विचारधारा एवं आदर्शो के सच्चे अनुयाई थे, सीधी विधानसभा से सात बार के विधायक और म.प्र. शासन के पूर्व आवास पर्यावरण एवं शालेय शिक्षा मंत्री थे। शिष्टाचार, सहजता, सौजन्यता और सामाजिक समरसता के संवाहक थे, सांप्रदायिक सद्भाव के प्रबल संरक्षक थे। गरीब, असहाय, वंचित, शोषित, पीडि़त एवं मजलूमों की प्रखर आवाज थे। सर्व समाज की उत्थान और प्रगति के लिए उनका संपूर्ण जीवन उद्देश्य था, दलीय प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर सर्व दलीय उनकी स्वीकार्यता थी।

जनपद अध्यक्ष श्रीमती सिंह ने अंत में कहा कि ऐसे महामानव की नगर पालिका परिषद सीधी के द्वारा मूर्ति स्थापना उनके महान और पुनीत कार्यों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है, उचित और सराहनीय कदम है जो प्रशंसनीय है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इशारे पर मूर्ति स्थापना के समय सीधी जिला प्रशासन के द्वारा जिस ढंग से बेवजह अवरोध और अड़ंगेबाजी उत्पन्न करने का प्रयास किया गया वह बेहद निराशाजनक और निंदनीय है। मूर्ति स्थापना स्थल सीधी में धारा बीएनएसएस की धारा-163 (144 सीआरपीसी) की घोषणा ने यह बात तो तय कर दी है की मूर्ति स्थापना को लेकर राजनीतिक कुचक्र और षडयंत्र रचे जा रहे हैं?

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भव्य आयोजन के साथ होना चाहिए प्रतिमा का अनावरण: केदारनाथ

पूर्व विधायक वरिष्ठ नेता पं.केदारनाथ शुक्ल का कहना है कि मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री स्वर्गीय इन्द्रजीत कुमार की प्रतिमा स्थापित हो गई है उसमें अब किसी तरह का विवाद उचित नही है। प्रतिमा का भव्य तरीके से अनावरण किया जाना चाहिए।

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जन भावनाओ के अनुरूप होना चाहिए प्रतिमा का लोकार्पण: विनय

विचारक एवं समाजसेवी विनय कुमार सिंह का कहना है कि सर्वहारा वर्ग एवं सर्व समाज के हितैषी, सामाजिक समरसता के प्रतीक पूर्व मंत्री स्वर्गीय इन्द्रजीत कुमार गरीब-शोषित वर्ग के हितचिंतक थे। श्री कुमार के साथ जिले सहित प्रदेशवासियों की जन भावनाएं जुड़ी हुई हैं। शासन-प्रशासन को जन भावनाओं के अनुरूप प्रतिमा का भव्यता के साथ लोकार्पण सुनिश्चित करना चाहिए।

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प्रतिमा अनावरण जरूरी नहीं अनिवार्य है: उमेश

समाजसेवी उमेश तिवारी ने कहा कि स्वर्गीय इंद्रजीत कुमार अपनी पार्टी के कार्यकत्र्ताओं के प्रेरणा श्रोत रहे ही है। हम जैसे कइयों के जो समता, समानता और भाईचारे पर विश्वास करते है उनके लिए भी प्रेरक रहे है। उनकी याद को बनाये रखने के लिए सीधी शहर में उनकी प्रतिमा अनावरण जरुरी नहीं अनिवार्य है उनकी प्रतिमा प्रेरणा का श्रोत बनेगी।

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