नयी दिल्ली, 11 जून (वार्ता) देश में बागवानी फसलों के उत्पादन और क्षेत्रफल को लेकर एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वर्ष 2025-26 के द्वितीय अग्रिम अनुमानों के अनुसार, इस साल देश का कुल बागवानी उत्पादन लगभग 3777.76 लाख टन तक पहुँचने की उम्मीद है।
यह आंकड़ा पिछले वर्ष यानी 2024-25 के अंतिम उत्पादन (3707.38 लाख टन) की तुलना में 70.39 लाख टन यानी 1.90 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही बागवानी फसलों के कुल क्षेत्रफल में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 301.36 लाख हेक्टेयर से बढ़कर अब 301.51 लाख हेक्टेयर हो गया है।
फलों के उत्पादन में आई रिकॉर्ड तेजी आने का अनुमान है। देश में फलों का कुल उत्पादन वर्ष 2024-25 के 1176.49 लाख टन से 38.26 लाख टन (3.25 प्रतिशत) बढ़कर अब 1214.75 लाख टन तक पहुँच सकता है। इसका कारण केला, आम, पपीता, सेब और अमरूद के उत्पादन में वृद्धि है।
अनुमान के अनुसार सब्जियों का रकबा और पैदावार दोनों बढ़े हैं। वर्ष 2024-25 में सब्जियों की खेती के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल 117.91 लाख हेक्टेयर था, जो अब 0.75 प्रतिशत बढ़कर 118.79 लाख हेक्टेयर हो गया है। क्षेत्रफल बढ़ने से सब्जियों का कुल उत्पादन भी पिछले साल के 2177.97 लाख टन से बढ़कर इस वर्ष 2210.00 लाख टन होने की संभावना है। बाजार में मुख्य रूप से आलू, टमाटर, भिंडी, मटर, फूलगोभी और लौकी की आवक में बड़ी वृद्धि अपेक्षित है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार आलू और टमाटर के उत्पादन में भारी वृद्धि हो सकती है। वर्ष 2025-26 में आलू का उत्पादन 598.89 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष के 585.71 लाख टन की तुलना में 13.18 लाख टन (2.25 प्रतिशत) अधिक है। वहीं, टमाटर का उत्पादन भी पिछले साल के 205.99 लाख टन से 8.62 लाख टन (4.19 प्रतिशत) की छलांग लगाते हुए इस वर्ष 214.61 लाख टन होने का अनुमान है।
प्याज के मोर्चे पर देखें तो इसकी खेती का क्षेत्रफल बढ़ा, पर उत्पादन में मामूली कमी आने का अंदेशा है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 की तुलना में इस साल प्याज की खेती के अंतर्गत क्षेत्रफल में 2.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने की संभावना है, जिससे इसका रकबा 19.68 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 20.14 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। हालांकि, उत्पादन के मोर्चे पर आंशिक गिरावट देखी जा सकती है; इस वर्ष प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 307.67 लाख टन था।
फूलों के उत्पादन में 7.47 प्रतिशत का बड़ा उछाल आ सकता है। फूलों की खेती का क्षेत्रफल 3.97 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.00 लाख हेक्टेयर होने जा रहा है। वहीं उत्पादन के स्तर पर इसमें लगभग 7.47 प्रतिशत की शानदार वृद्धि का अनुमान है, जिससे इस वर्ष फूलों का उत्पादन 42.65 लाख टन से बढ़कर 45.84 लाख टन तक पहुँचने की संभावना है।
मसालों और रोपण फसलों की स्थिति मजबूत बनी हुयी है। मसालों के विकास के लिए जिम्मेदार एजेंसी (डीएएसडी) द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में मसालों के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल 50.00 लाख हेक्टेयर और कुल उत्पादन 126.55 लाख टन तक पहुँचने की उम्मीद है। इस दौरान बाजार में मुख्य रूप से लहसुन, हल्दी, करी पत्ता और मेथी के उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखी जाएगी।
इसके अलावा, रोपण फसलों के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल 46.56 लाख हेक्टेयर और उत्पादन लगभग 169.34 लाख टन रहने का अनुमान है।
सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। देश में पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय खेती के प्रति भी रुझान बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, सुगंधित एवं औषधीय पौधों का उत्पादन वर्ष 2024-25 के 9.01 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 9.76 लाख टन होने की पूरी संभावना है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जमीनी रिपोर्टों और सरकारी एजेंसियों से संकलित इन सूचनाओं के बाद तैयार किए गए यह द्वितीय अग्रिम अनुमान देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
