ग्वालियर: राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) के अंतर्गत होम्योपैथी आचार व पंजीकरण बोर्ड (बीईआरएच) ने पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम-2020 के तहत होम्योपैथी देश में विधिक रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति है व राष्ट्रीय अथवा राज्य रजिस्टर में पंजीकृत चिकित्सकों को कानून के अनुरूप चिकित्सा अभ्यास का अधिकार प्राप्त है।
आयोग ने डिजिटल और सोशल मीडिया मंचों पर होम्योपैथी तथा पंजीकृत चिकित्सकों के विरुद्ध की जा रही अपमानजनक, मानहानिकारक और भ्रामक टिप्पणियों पर गंभीर चिंता जताई है। परिपत्र में कहा गया है कि किसी भी पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सक को झोलाछाप बताने वाली प्रेस विज्ञप्ति, इंटरनेट मीडिया पोस्ट, वेबसाइट सामग्री, सरकारी दस्तावेज, प्राथमिकी (एफआईआर), शिकायत या आधिकारिक संचार भ्रामक और मानहानिकारक माना जाएगा। ऐसा कृत्य चिकित्सकों की पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के साथ उनके वैधानिक व संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी हो सकता है।
आयोग ने सभी संस्थानों, अधिकारियों और संबंधित पक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे होम्योपैथी से जुड़े मामलों में सार्वजनिक बयान जारी करते समय संयमित एवं तथ्यात्मक भाषा का प्रयोग करें। यदि किसी चिकित्सक के आचरण को लेकर शिकायत हो तो उसका निराकरण वैधानिक एवं अनुशासनात्मक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए, न कि पूरे होम्योपैथिक पेशे को कटघरे में खड़ा कर। आयोग ने चेतावनी दी है कि होम्योपैथी एवं उसके पंजीकृत चिकित्सकों की छवि धूमिल करने के किसी भी जानबूझकर किए गए प्रयास पर लागू कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वागत करने योग्य निर्णय : डा. पंकज मौर्य
डॉ पंकज मौर्य ने आयोग के परिपत्र का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों को झोलाछाप कहे जाने के विरुद्ध लंबे समय से मांग की जा रही थी। आयोग का यह निर्णय होम्योपैथिक चिकित्सकों की गरिमा की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
