मुजफ्फराबाद, 10 जून (वार्ता) बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) के प्रमुख अल्लाह नजर बलूच ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शनों पर पाकिस्तान के रुख की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ता प्रतिरोध आंदोलन यह दर्शाता है कि अधिकारों, आत्मनिर्णय और राजनीतिक स्वतंत्रता की मांगों को ताकत के बल पर नहीं दबाया जा सकता है।
‘अरब न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उनका यह बयान तब आया है, जब क्षेत्रीय सरकार ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के चार प्रमुख नेताओं के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने का आदेश देने के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तलाशी अभियान शुरू किया है। सरकार ने पिछले शुक्रवार को इस समूह पर प्रतिबंध लगाने के बाद इनकी गिरफ्तारी पर एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये (करीब 34 लाख 29 हजार भारतीय रुपये) के इनाम की भी घोषणा की है।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पीओजेके में अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, बलूच ने कहा कि पीओजेके में चल रहा आंदोलन मौलिक अधिकारों, आत्मनिर्णय और इस्लामाबाद के कथित दबदबे से मुक्ति के लिए वहां के लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने असंतोष को दबाने के लिए हमेशा दमनकारी कदमों का सहारा लिया है, लेकिन वह राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों के लिए उठने वाली जनभावनाओं को रोकने में नाकाम रहा है।
पाकिस्तान के दावों पर सवाल उठाते हुए बलूच ने कहा कि यह क्षेत्र सिर्फ नाम के लिए आजाद है, जबकि इस पर असल नियंत्रण इस्लामाबाद के अधिकारियों का ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाले बड़े फैसले कश्मीरी जनता के चुने प्रतिनिधियों के बजाय केंद्र सरकार के अधिकारियों और नौकरशाहों की ओर से लिये जाते हैं।
बलूच ने आगे तर्क दिया कि पाकिस्तान के संघीय ढांचे का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से छोटे समुदायों और क्षेत्रों पर पंजाब का दबदबा बनाये रखने के लिए किया गया है। उनके अनुसार, कश्मीर में प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ ताकत का इस्तेमाल उस देश की असुरक्षा को दिखाता है, जो अधिक स्वायत्तता और राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रही जनता पर अपना नियंत्रण बनाये रखना चाहता है। पीड़ित स्थानीय समुदायों के बीच एकजुटता पर जोर देते हुए बलूच ने कहा कि कोई भी देश अनिश्चित काल के लिए थोपे गये नियंत्रण में नहीं रह सकता। उन्होंने बाहरी वर्चस्व के खिलाफ प्रतिरोध को एक वैध अधिकार बताया। उन्होंने कश्मीरी, पख्तून और सिंधी समुदायों को अपना समर्थन देते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक आकांक्षाएं अंतरराष्ट्रीय ध्यान और समर्थन की हकदार हैं। उन्होंने पीड़ित समूहों से अपने राजनीतिक अधिकारों और स्वशासन के लिए एकजुट होने का भी आह्वान किया।
उनके ये बयान ऐसे समय में आये हैं, जब बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों और उसके बाद सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई के कारण पूरे पीओजेके में अशांति बनी हुई है। दरअसल जेएएसी ने पीओजेके विधानसभा के लिए 27 जुलाई को होने वाले चुनावों में शरणार्थियों के लिए 12 सीटें आरक्षित किये जाने के विरोध में पूरे क्षेत्र में हड़ताल का आह्वान किया था। इन सीटों पर इस क्षेत्र के बजाय पाकिस्तान में अन्य जगहों पर रहने वाले उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र की राजधानी मुजफ्फराबाद में पूरी तरह से बंद रहा। वहां के एक निवासी जाहिद अमीन के हवाले से कहा गया, “हर दुकान, हर बाजार, हर गली, हर सड़क और हर चौराहा पूरी तरह बंद है।”
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी प्रदर्शनों पर हुई इस कार्रवाई की निंदा की है। उसने इसे ‘हिंसक और दमनकारी कार्रवाई’ बताते हुए इंटरनेट पर पाबंदी, बड़े पैमाने पर की गयीं गिरफ्तारियों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल का हवाला दिया। इससे पहले आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों को लेकर जेएएसी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन भी हिंसक रूप ले चुके हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई थीं।
भारत ने भी इन घटनाक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग की रिपोर्ट देखी हैं। उन्होंने उम्मीद जतायी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्र में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहरायेगा।
