राजगढ़। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मंगलवार को विशेष प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन किया गया. इस विशेष अभियान की कमान स्वयं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शोभा पटेल ने संभाली. स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले की सक्रियता के चलते जिले भर में रिकॉर्ड 1019 से अधिक गर्भवती महिलाओं ने शिविरों में पहुंचकर अपना पंजीयन कराया और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया. इस अवसर पर डीसीएम सुनील वर्मा भी मौजूद थे.
14 स्वास्थ्य संस्थाओं में तैनात रहे नामजद डॉक्टर
9 जून को आयोजित इस विशेष शिविर के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक दिन पूर्व से ही व्यापक तैयारियां की जा रही थीं. सीएमएचओ डॉ. पटेल ने बताया कि जिले की 14 प्रमुख स्वास्थ्य संस्थाओं पर इन विशेष शिविरों का आयोजन किया गया था. व्यवस्थाओं को पारदर्शी और सुचारू बनाए रखने के लिए प्रत्येक केंद्र पर जांच अधिकारी डॉक्टरों की नामजद ड्यूटी लगाई गई थी. इसके साथ ही आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और सीएचओ को मैदानी स्तर पर गर्भवती महिलाओं को प्रेरित कर अस्पताल लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. जिसका असर शिविरों में उमड़ी भीड़ के रूप में देखने को मिला.
सभी प्रकार की हुईं जांचे
शिविर में आईं सभी 1019 से अधिक महिलाओं का न केवल पंजीयन किया गया, बल्कि उनकी व्यापक स्वास्थ्य जांचें भी की गईं. अत्याधुनिक मशीनों से महिलाओं की सोनोग्राफी की गई, खून की जांचें, हीमोग्लोबिन, शुगर आदि की गईं और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई. डॉक्टरों द्वारा उचित परामर्श देने के साथ-साथ आवश्यक दवाइयां और उपचार भी मौके पर ही सुनिश्चित किया गया.
गर्भावस्था में क्यों जरूरी है हर माह जांच?
जिला अस्पताल में आयोजित जांच शिविर की प्रभारी डॉ. प्रतिभा वशिष्ठ ने गर्भावस्था के दौरान जांचों के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि नियमित जांचों से गर्भ में पल रहे बच्चे की शारीरिक वृद्धि और उसकी स्थिति का समय पर पता चलता रहता है. हीमोग्लोबिन की समय-समय पर जांच होने से महिला में खून की कमी, एनीमिया को रोका जा सकता है जो प्रसव के समय बेहद खतरनाक साबित हो सकती है.
यदि गर्भावस्था में कोई जटिलता है, तो प्रति माह की जाने वाली जांचों से उसे शुरुआती चरणों में ही पकडक़र ठीक किया जा सकता है. नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़ और खिलचीपुर के स्वास्थ्य केंद्रों पर शिविर की व्यवस्थाएं संतोषजनक थीं. और सभी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर बैठक व्यवस्था की गई थी. कूलर-पंखा, शुद्ध पेयजल और पौष्टिक स्वल्पाहार के इंतजाम किए गए थे. मैदानी अमले के मोबिलाइजेशन के कारण ही इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं जांच के लिए आगे आई.
डॉ. शोभा पटेल, सीएमएचओ, राजगढ़
