भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस को मंगलवार को 983 नव प्रशिक्षित आरक्षकों के रूप में बड़ी मजबूती मिली। पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी), इंदौर में लगभग एक वर्ष के कठोर एवं अनुशासित प्रशिक्षण के बाद 78वें बैच के आरक्षक भव्य दीक्षांत परेड के साथ औपचारिक रूप से पुलिस बल की मुख्यधारा में शामिल हो गए। इस बैच में 787 महिला और 196 पुरुष आरक्षक शामिल हैं।
दीक्षांत परेड की सलामी मध्यप्रदेश पुलिस के महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने मुख्य अतिथि के रूप में ली और परेड का निरीक्षण किया। समारोह में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षुओं के परिजन तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत उसके अधिकार या हथियार नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है। उन्होंने नव आरक्षकों से ईमानदारी, संवेदनशीलता और पेशेवर दक्षता के साथ जनता की सेवा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास आने वाला पीड़ित व्यक्ति केवल कानूनी सहायता ही नहीं, बल्कि भरोसा, सहानुभूति और न्याय की अपेक्षा भी लेकर आता है।
मकवाणा ने कहा कि आधुनिक अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और साइबर अपराध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग नई चुनौतियां बनकर उभर रहा है। ऐसे में पुलिसकर्मियों का तकनीकी रूप से दक्ष, मानसिक रूप से संतुलित और नैतिक रूप से मजबूत होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्दी शक्ति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने वर्ष 2025 में प्रदेश को नक्सलवाद के खतरे से मुक्त करने की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए साइबर अपराध और नशे को समाज के सामने उभरती गंभीर चुनौतियां बताया।
महानिदेशक ने आगामी सिंहस्थ-2028 को पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन में नव आरक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विश्वास जताया। समारोह के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को सम्मानित किया गया तथा नव आरक्षकों ने टीम भावना और कौशल का शानदार प्रदर्शन प्रस्तुत किया।
