वाशिंगटन, 09 जून (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए अमेरिकी सेना के अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर के दोनों पायलट पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी को कोई गंभीर चोट नहीं आई है।
श्री ट्रम्प ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “पायलट बिल्कुल ठीक हैं, कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि अपाचे हेलीकॉप्टर से जुड़े इस हादसे की विस्तृत रिपोर्ट ‘कल’ जारी की जाएगी।
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना का एक एएच-64 अपाचे सोमवार को होर्मुज के पास गिर गया था। हादसा किस वजह से हुआ, यह अभी साफ नहीं है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने अभी तक इस घटना पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।
सेंटकॉम की वेबसाइट के अनुसार, अपाचे हेलीकॉप्टर पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों का एक मुख्य हथियार है, जिसका उपयोग सटीक हमलों, नजदीकी हवाई सहायता और हवाई टोह लेने जैसे कामों के लिए किया जाता है। इस लड़ाकू विमान का इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन में ईरान द्वारा पैदा की जाने वाली बाधाओं से निपटने के लिए भी किया जा रहा है। अगर इस घटना की आधिकारिक पुष्टि हो जाती है, तो ईरान के साथ शुरू हुए इस संघर्ष में यह पहले अपाचे हेलीकॉप्टर का नुकसान होगा।
मई में जारी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत में ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना अपने दर्जनों विमान गंवा चुकी है। इनमें कम से कम पांच लड़ाकू विमान, सात स्ट्रैटोटैंकर रिफ्यूलिंग विमान, एक खोज-और-बचाव हेलीकॉप्टर और दो दर्जन से अधिक ड्रोन शामिल हैं।
इससे पहले अप्रैल की शुरुआत में, अमेरिकी सेना को ईरान के भीतर मार गिराए गए एक एफ-15ई स्ट्राइक ईगल के पायलट को बचाने के लिए एक बेहद जोखिम भरा अभियान चलाना पड़ा था। इस खुफिया मिशन के दौरान अमेरिकी सेना को ईरान की धरती पर ही अपने दो विशेष अभियान विमानों को उड़ाना पड़ा था, जिसमें विशेष अभियान बलों सहित सैकड़ों अमेरिकी सैन्य और खुफिया कर्मी शामिल थे।
इस बीच श्री ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए ईरान के साथ जारी राजनयिक प्रयासों को लेकर भी उम्मीद जताई और संकेत दिया कि अगले कुछ दिनों में एक संभावित समझौता हो सकता है। उन्होंने कहा, “हमारे पास अच्छा मौका है। हम एक बहुत, बहुत अच्छे, मजबूत और शक्तिशाली समझौते के बेहद करीब हैं।”
अमेरिका और ईरान के बीच हालांकि बातचीत लगातार कठिन बनी हुई है। दोनों देशों के बीच ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार, प्रतिबंधों में ढील और ईरान की ‘जब्त ‘ की गई संपत्तियों को जारी करने को लेकर बड़े मतभेद बने हुए हैं।
