वाशिंगटन | अमेरिका के एक फेडरल जज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद प्रस्ताव पर रोक लगा दी है, जिसमें H-1B वीजा के तहत विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाले नियोक्ताओं पर 1,00,000 डॉलर की भारी फीस लगाने की बात कही गई थी। डिस्ट्रिक्ट जज रिचर्ड स्टर्न्स ने अपने फैसले में कहा कि यह प्रस्ताव शक्तियों के बंटवारे के संवैधानिक सिद्धांत का सीधा उल्लंघन है।
विदेशी कुशल श्रमिकों पर मंडरा रहा था संकट
ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि H-1B वीजा का दुरुपयोग अमेरिकी कर्मचारियों के हितों को नुकसान पहुँचा रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। हालांकि, इस भारी फीस के कारण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पहले से जारी कुशल श्रमिकों की कमी और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही थी। जज के इस फैसले से उन कंपनियों को बड़ी राहत मिली है जो उच्च-कुशल विदेशी पेशेवरों पर निर्भर हैं।
वीजा प्रोग्राम के भविष्य पर असर
H-1B वीजा प्रोग्राम का उद्देश्य अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेष तकनीकी कार्यों के लिए स्नातक स्तर के योग्य विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देना है। कांग्रेस द्वारा निर्धारित वर्तमान सीमाओं के भीतर काम करने वाले इस प्रोग्राम में मनमाने ढंग से भारी फीस लगाने से बाजार आधारित व्यापार मॉडल कमजोर हो रहा था। यह फैसला अब स्पष्ट करता है कि किसी भी प्रकार की शुल्क वृद्धि या नीतिगत बदलाव कानूनी प्रक्रियाओं और संवैधानिक दायरे में ही होने चाहिए।

