बेरूत/यरुशलम, 07 जून (वार्ता) इज़रायल ने रविवार को लेबनान के प्राचीन तटीय शहर टायर के निवासियों के लिए नयी निकासी चेतावनी जारी की। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब इज़रायली बलों और ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्ला के बीच संघर्ष अमेरिका की मध्यस्थता में हुए इज़राइल-लेबनान युद्धविराम के बावजूद तेज होता जा रहा है।
नयी चेतावनी टायर शहर के आसपास के इलाकों और शरणार्थी शिविरों में रहने वाले लोगों पर भी लागू की गई है। भूमध्यसागर के तट पर स्थित यह शहर उन क्षेत्रों के उत्तर में है जहां इज़राइली सेना की मौजूदगी बनी हुई है।
इज़रायल ने कहा कि हिज़्बुल्ला द्वारा युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किये जाने के कारण नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह निकासी आवश्यक है। हिज़्बुल्ला इस युद्धविराम समझौते का पक्षकार नहीं था और उसने स्पष्ट किया है कि जब तक इज़रायली सेना लेबनान की भूमि पर मौजूद रहेगी, वह इस समझौते को स्वीकार नहीं करेगा।
इस बीच, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने हिज़्बुल्ला प्रमुख नईम कासिम की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है। श्री कासिम द्वारा समझौते को खारिज किये जाने के बाद राष्ट्रपति ने शुक्रवार को सीएनएन को दिये एक साक्षात्कार में कहा कि श्री कासिम पूरे लेबनानी समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्होंने कहा, “लेबनान के लोग आपके लोग नहीं हैं। वे लेबनानी लोग हैं, नईम कासिम के लोग नहीं।”
इससे पहले रविवार को इज़रायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने कहा कि उसने लेबनान से उत्तरी इज़राइल की ओर दागे गए दो प्रक्षेपास्त्रों को मार गिराया है। वहीं, शनिवार को लेबनानी सेना ने आरोप लगाया कि दक्षिणी लेबनान में उसके एक सैन्य वाहन पर इज़रायली हमले में कई सैनिक मारे गये, जिनमें एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल था। इस घटना के बाद लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) ने भी चिंता व्यक्त की।
जवाब में आईडीएफ ने कहा कि वाहन “संदिग्ध गतिविधियां” करते हुए देखा गया था, जिसके बाद उस पर हमला किया गया। इज़रायली सेना के अनुसार क्षेत्र को पहले ही खाली करा लिया गया था और उसे इस बात के “ठोस संकेत” मिले थे कि वहां हिज़्बुल्ला सक्रिय था। इसी सप्ताहांत दक्षिणी लेबनान में हुई अलग-अलग घटनाओं में दो इज़रायली सैनिकों की भी मौत हुई है। इसकी पुष्टि इज़राइली सेना ने की है।
युद्धविराम लागू होने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच जारी सैन्य गतिविधियों और आरोप-प्रत्यारोप ने क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाओं पर नए सवाल खड़े कर दिये हैं।
