नई दिल्ली | यूपीए सरकार के अंतिम दिनों में शुरू की गई ’80:20 गोल्ड इंपोर्ट-एक्सपोर्ट स्कीम’ एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आई है। इस विवादित स्कीम का लाभ उठाकर कई कंपनियों ने सोने के आयात और निर्यात में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया। इस मामले में भगोड़े हीरा कारोबारी जतिन मेहता की कंपनी ‘विंसम डायमंड्स’ का नाम प्रमुखता से आया है, जिनके संबंध देश के बड़े व्यापारिक घरानों से भी जुड़े बताए जाते हैं।
नीतिगत बदलाव और अनियमितताएं
अप्रैल 2019 में पीएसी की ड्राफ्ट रिपोर्ट में मई 2014 में हुए उस नीतिगत बदलाव पर सवाल उठाए गए, जिसने बड़े एक्सपोर्टर्स को स्कीम का लाभ लेने की खुली छूट दे दी। आरोप है कि इस बदलाव के जरिए इनवॉइस में हेरफेर कर काले धन की राउंड-ट्रिपिंग को आसान बनाया गया। इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा कमाना था, लेकिन सरकारी तंत्र में हुई इन खामियों ने इसे काले धन को वैध बनाने का जरिया बना दिया।
कैग की रिपोर्ट का बड़ा खुलासा
कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस 80:20 स्कीम की कोई वास्तविक आवश्यकता ही नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, सोने के निर्यात से प्राप्त विदेशी मुद्रा की तुलना में, कंपनियों को टैक्स और कस्टम ड्यूटी में दी गई छूट के कारण सरकारी खजाने को कहीं अधिक नुकसान उठाना पड़ा। इस खुलासे ने तत्कालीन आर्थिक नीतियों और उनके क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

