नयी दिल्ली, 05 जून (वार्ता) सेवा और विनिर्माण क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन के दम पर वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गयी जो 2022-23 आधार वर्ष पर शुरू नयी सीरीज में सबसे तेज है। वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत और 2024-25 में (पहला संशोधित अनुमान) 7.1 प्रतिशत रही थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 और उसकी चौथी तिमाही के जीडीपी के प्राथमिक अनुमान जारी किये। अनुमान में बताया गया है कि गत 31 मार्च को समाप्त पिछले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी 323.12 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह एक साल पहले 299.89 लाख करोड़ रुपये था। वर्तमान मूल्यों पर आधारित नॉमिनल जीडीपी या सांकेतिक जीडीपी 346.36 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है।
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में स्थिर मूल्य पर आधारित वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही और यह 87.77 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गयी। तीसरी तिमाही में वृद्धि दर आठ प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 8.3 प्रतिशत और पहली तिमाही में 6.8 प्रतिशत रही थी। चौथी तिमाही में नॉमिनल जीडीपी 9.1 प्रतिशत बढ़कर 94.65 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गयी। प्राथमिक अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में सकल पूंजी निर्माण 9.9 प्रतिशत बढ़कर 110.64 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया रहा। जीडीपी में इसका योगदान 31.9 प्रतिशत रहा।
निजी उपभोग व्यय 9.4 प्रतिशत और सरकारी उपभोग व्यय 8.7 प्रतिशत बढ़कर क्रमशः 196.51 लाख करोड़ रुपये और 36.91 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। जीडीपी में निजी उपभोग व्यय की हिस्सेदारी बढ़कर तीन साल के उच्चतम स्तर 56.7 प्रतिशत पर रही। सरकारी उपभोग व्यय जीडीपी के 10.7 प्रतिशत पर स्थिर रहा। व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण से संबंधित सेवाओं और भंडारण क्षेत्र में सबसे तेज 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 10.7 प्रतिशत और वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी, पेशेवर सेवाओं एवं आवासीय स्वामित्व की 10.4 प्रतिशत रही। निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत, खनन की 5.2 प्रतिशत और लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाओं की पांच प्रतिशत दर्ज की गयी। कृषि, पशुपालन, वानिकी एवं मत्स्य पालन की वृद्धि दर तीन प्रतिशत और बिजली, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य यूटिलिटी सेवाओं की 1.7 प्रतिशत रही। पूरे वित्त वर्ष के दौरान प्रति व्यक्ति जीडीपी 7.9 फीसदी बढ़कर 2,43,803 रुपये रही। प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय भी 7.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,08,090 रुपये दर्ज की गयी।

