
सारनी। क्षेत्र के रहवासी वर्तमान में वानर सेना के भय और परेशानी के साए में देखे जा रहे हैं। सतपुड़ा के जंगलों से वर्षों से शहर क्षेत्र में पहुँच रहे लाल एवं काले रंग के वानरों की बढ़ती संख्या अब नगरवासियों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है। रहवासियों का आरोप है कि पूर्व में नगर पालिका परिषद द्वारा वानर सेना को पकड़कर जंगलों में छोड़ने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, ठेकेदारों को भुगतान भी हुआ, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। आज भी शहर के कई वार्डों में वानरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है, जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।नगरवासियों का कहना है कि सुबह से लेकर शाम तक बंदरों के झुंड मकानों की छतों, गलियों और बाजार क्षेत्रों में उत्पात मचाते देखे जा सकते हैं।
कई बार ये बंदर घरों में घुसकर खाद्य सामग्री नुकसान पहुंचाते हैं, बच्चों एवं बुजुर्गों पर हमला कर चुके हैं तथा महिलाओं में भी भय का वातावरण बना हुआ है। रहवासियों ने आरोप लगाया कि वानरों को पकड़ने का कार्य ईमानदारी और गंभीरता से नहीं किया गया, जिसके कारण लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका।स्थानीय नागरिकों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते प्रभावी योजना नहीं बनाई गई तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है। लोगों ने नगर पालिका परिषद एवं वन विभाग से संयुक्त रूप से ठोस कार्रवाई करने, वैज्ञानिक तरीके से वानरों के पुनर्वास की व्यवस्था करने तथा प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने की मांग की है।
