भोपाल: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित पर्यावरण पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की सनातन संस्कृति में निहित पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा को समझने और अपनाने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को पूजनीय माना गया है और “यत पिंडे तत ब्रह्मांडे” का सिद्धांत मानव और प्रकृति के गहरे संबंध को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जीवन शैली में प्राचीन काल से ही पौधों में भी प्राण होने की मान्यता रही है तथा एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान महत्व दिया गया है। उन्होंने सभी नागरिकों से प्रकृति संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई देते हुए कहा कि वर्ष 2014 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद देश में स्थिरता और सुशासन का नया अध्याय शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने ऊर्जा और आर्थिक क्षेत्र में मजबूती बनाए रखी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश ग्रीन एनर्जी, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के क्षेत्र में देश के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि पंच तत्वों पर सभी का समान अधिकार है और इनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी हम सभी की है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया और सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दीं
