भोपाल: मध्य प्रदेश शासन ने शासकीय कर्मचारियों के वेतन निर्धारण में सामने आ रही प्रशासनिक और वित्तीय विसंगतियों को रोकने के लिए सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। शासन के संज्ञान में आया है कि कुछ विभागों में कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों को सेवा भर्ती नियमों के विपरीत उच्चतर वेतनमान स्वीकृत कर दिए गए। कई मामलों में वेतनमान का अनुमोदन और सत्यापन संयुक्त संचालक, कोष एवं लेखा से समय पर नहीं कराया गया, जिसके चलते बाद में न्यायालयों में विवाद उत्पन्न हुए और कर्मचारियों के पक्ष में फैसले आए।
वित्त विभाग ने पूर्व में जारी परिपत्रों का हवाला देते हुए सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों तथा विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि सेवा नियमों के अनुरूप ही वेतनमान स्वीकृत किए जाएं। किसी भी विशेष या विवादित स्थिति में संयुक्त संचालक, कोष एवं लेखा से पूर्व-अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।इसके साथ ही शासन ने आगामी छह माह में सेवानिवृत्त होने वाले सभी कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों और वेतन निर्धारण की विशेष जांच का अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान कर्मचारियों के पूरे सेवाकाल के वेतन निर्धारण का सत्यापन सेवानिवृत्ति से पहले ही कराया जाएगा, ताकि बाद में वसूली या अन्य वित्तीय विवाद की स्थिति न बने। विशेष अभियान को तीन माह के भीतर पूरा कर इसकी रिपोर्ट आयुक्त, कोष एवं लेखा, भोपाल को भेजना अनिवार्य किया गया है।
