खतरे में है धरती और आपका स्वास्थ्य! WHO की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, जानें कैसे बचें

2026 में पर्यावरण दिवस की थीम Climate action है- जलवायु कार्रवाई। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तत्काल कदम उठाना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है।

World Environment Day: प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। मानव और प्रकृति का संबंध गहरा होता है। पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व जल, वायु, भूमि, वनस्पति तथा बायो डायवर्सिटी पर निर्भर करता है।

प्रकृति ही मानव को संतुलित और स्वस्थ जीवन जीना सिखाता है। धरती हमारे घर के समान है और इसकी हरियाली को बचाना हमारा कर्तव्य है। साल 2026 में, जहां कंक्रीट के जंगल लगातार बढ़ते जा रहे हैं और मौसम हर पल बदल रहा है, वहां एक दिन किसी जागरूकता के लिए काफी नहीं है। पर्यावरण के संतुलन से ही जीवन सुरक्षित रह सकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास
विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने का फैसला साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्टॉकहोम सम्मेलन में लिया गया था, जिसका थीम पर्यावरण संरक्षण था। इसके बाद से ही हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस सेलिब्रेट करने का निर्णय लिया गया। पहली बार यह खास दिन 5 जून, 1974 को मनाया गया, तब विश्व पर्यावरण दिवस की थीम एक पृथ्वी रखी गई थी। संयुक्त राष्ट्र का यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर्यावरण पहुंच के लिए सबसे बड़ा वैश्विक मंच बन गया है, जिसमें दुनिया भर के लाखों लोग पृथ्वी की रक्षा के लिए शामिल होते हैं।

भारत समेत पूरे विश्व में प्रदूषण काफी तेजी से फैल रहा है। इस वजह से दिनोंदिन हमारी प्रकृति को काफी नुकसान पहुंचता है। प्रकृति को प्रदूषण से बचाने के लिए ही पर्यावरण दिवस को मनाया जाता है। इस दिन लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक किया जाता है और प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

स्वस्थ पर्यावरण बीमारियों के बोझ को कर सकता है कम
डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वस्थ वातावरण दुनिया भर में होने वाली बीमारियों के लगभग एक चौथाई हिस्से को कम कर सकता है। साफ हवा, स्थिर जलवायु, पर्याप्त पानी, सैनिटेशन, हाइजीन, रसायनों का सुरक्षित तरीके से उपयोग, विकिरण से सुरक्षा, स्वस्थ और सुरक्षित कार्यस्थल, बेहतर वातावरण और एक संरक्षित प्रकृति अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। 24 प्रतिशत सभी वैश्विक मौतें पर्यावरण से संबंधित होते हैं, जो सालाना लगभग 13.7 मिलियन के करीब होने वाली मौतें हैं।

खराब पर्यावरण से बढ़ने वाले जोखिम
पर्यावरण के प्रदूषित होने से कई तरह के रोगों के होने का जोखिम बढ़ सकता है। इनमें रेस्पिरेटरी डिजीज, हृदय रोग और कई प्रकार के कैंसर आदि शामिल हैं। जिन लोगों की आय कम होती है, उनके प्रदूषित क्षेत्रों में रहने की संभावना अधिक होती है। उनके पास ना तो रहने के लिए साफ-सुथरी जगह होती है, ना ही पीने के लिए साफ-स्वच्छ पानी होता है, ऐसे में छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को प्रदूषण से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अधिक बढ़ जाता है।

मानव स्वास्थ्य के लिए एक स्वच्छ वातावरण बेहद आवश्यक है। कई बार स्थानीय वातावरण भी कई तरह की सेहत संबंधित समस्याओं को पैदा करते हैं। उदाहरण के लिए वायु प्रदूषण, शोर-शराबा, खतरनाक रसायन आदि स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

‘Climate Action’ के मायने
इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के महत्व और जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों के बारे में जागरूक करना है।

कार्बन डाइ ऑक्साइज जैसे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना। कोयले और तेल जैसे जीवाश्म ईंधनों का उपयोग घटाकर सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसी रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल पर जोर देना।

क्लाइमेट चेंज से होने वाले बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी मौसम की घटनाओं से निपटने की तैयारी करना।

कृषि, जल संरक्षण और बुनियादी ढांचे को इस तरह मजबूत करना कि मौसम के बदलते पैटर्न से कम से कम नुकसान हो सके।

क्लाइमेट एक्शन की मदद से सरकार, बिजनेसमैन और आम लोग मिलकर पृथ्वी को रहने योग्य बनाए रखने का प्रयास करें।

पर्यावरण को स्वच्छ रखने के उपाय

  • प्लास्टिक बोतल की जगह कांच, स्टील या अन्य धातु से बने बोतल का इस्तेमाल करें।
  • प्लास्टिक की थैली का इस्तेमाल ना करें। कपड़े का झोला या कागज से बने पॉलीबैग का इस्तेमाल करें।
  • घर का कचरा बाहर खुले में ना फेंके।
  • पानी और ऊर्जा की बचत करें।
  • कचरे को अलग-अलग करके रीसाइक्लिंग को बढ़ावा दें।
  • पेड़ों को काटने की बजाय अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाएं।
  • प्लास्टिक, कांच, लोहे आदि की चीजों को रीसाइकिल करें।
  • पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में भाग लें और खुद भी जागरूक हों और दूसरों को भी जागरूक करें।
  • नए कपड़े कम से कम खरीदें। फैशन इंडस्ट्री से होने वाला प्रदूषण हर दिन बढ़ता जा रहा है। इन कपड़ों को डीकंपोज
  • होने में 200 सालों तक का समय लगता है।

 

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