
इंदौर. शहर के चर्चित हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग केस में क्राइम ब्रांच की जांच लगातार तेज होती जा रही है. मामले में गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि जब्त किए गए मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है. पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे नेटवर्क और ब्लैकमेलिंग के दावों की सच्चाई सामने आएगी.
इस मामले के तार एक संगठित सिंडिकेट से जुड़े होने की आशंका के चलते हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है. आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस को एफएसएल भेजा गया है, जहां से रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि आपस में किस तरह की बातचीत हुई और क्या किसी को ब्लैकमेल करने के लिए आपत्तिजनक वीडियो तैयार किए गए थे. डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश त्रिपाठी ने बताया कि सोशल मीडिया पर 32 जीबी पेनड्राइव और वीडियो से जुड़े कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन फिलहाल इनके समर्थन में कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं मिला है. उन्होंने साफ कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. जांच में पुलिस की नजर मुख्य आरोपी श्वेता जैन पर भी टिकी हुई है, जिसके पुराने रिकॉर्ड और गतिविधियों को खंगाला जा रहा है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में हनीट्रैप के साथ-साथ शुद्ध ब्लैकमेलिंग और उगाही का संगठित खेल चलाया जा रहा था. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में इस हाई प्रोफाइल मामले में बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है.