नयी पेंशन योजना के विस्तार के लिए नीतिगत सुधार, वाणिज्यिक बैंक शुरू कर सकेंगे पेंशन कोष

नयी दिल्ली, 01 जनवरी (वार्ता) पेंशन विनियामक ने अनुसूचित वाणिज्यक बैंकों को भी नयी पेंशन योजना (एनपीएस) के अंतर्गत स्वतंत्र रूप से पेंशन कोष चलाने की छूट देने की तैयारी के साथ साथ एनएपीए के प्रोत्साहन के लिए प्रबंधनाधीन निधि का कुछ पैसा योजना के प्रचार प्रसार के लिए बिचौलिया इकाइयों की मदद को मंजूरी दी है वित्त मंत्रालय की गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए ) ने वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) को पेंशन कोष शुरू करने की छूट के नियमों को मंजूरी दे दी है। इसका उद्येश्य प्रतिस्पर्धा और ग्राहक सुरक्षा मजबूत करना है। प्रस्तावित नये नियमों के तहत से पीएफआरडीए के समग्र मार्गदर्शन के अंतर्गत समन्वित जागरूकता, पहुंच और वित्तीय-साक्षरता पहल का समर्थन करने के लिए एयूएम का 0.0025 प्रतिशत एनपीएस इंटरमीडियरीज -(बिचौलिया फर्मों) के संघ (एएनआई) को दिया जाएगा।
पीएफआरडीए के नियामकीय सुधारों में वर्तमान बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया गया है। अभी एनपीएस में बैंकों की भागीदारी सीमित थी।

भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों के अनुरूप मजबूत बैंकों को ही पेंशन फंड प्रायोजित करने की अनुमति होगी। वित्त मंत्रालय का कहना है कि विस्तृत मानदंड अलग से अधिसूचित किए जाएंगे और नये तथा वर्तमान दोनों पेंशन फंडों पर लागू होंगे। इसके साथ ही एनपीएस ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नये न्यासियों की नियुक्ति की गयी है। इनमें भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा, यूटीआई एएमसी – ट्रस्टी की पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष स्वाति अनिल कुलकर्णी, डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक और प्रमुख और सिडबी द्वारा प्रबंधित फंड ऑफ फंड्स स्कीम के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यम पूंजी निवेश समिति के सदस्य डॉ. अरविंद गुप्ता शामिल हैं। श्री खारा को एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी नामित किया गया है।

उभरती वास्तविकताओं, खुदरा और गिग-इकोनॉमी क्षेत्रों में बीमा सुरक्षा का विस्तार करने के उद्देश्य के साथ पीएफआरडीए ने पहली अप्रैल 2026 से पेंशन फंड के लिए निवेश प्रबंधन शुल्क (आईएमएफ) संरचना को संशोधित किया है। संशोधित स्लैब-आधारित आईएमएफ में सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र के ग्राहकों के लिए अलग-अलग दरें होंगी है। एमएसएफ कोष को अलग-अलग गिना जाएगा। कंपोजिट स्कीम के अंतर्गत सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों या स्वत: चयन और सक्रिय चयन और 100 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश का वविकल्प चुनने वालों के लिए आईएमएफ समान रहेगा।
एयूएम के स्लैब (करोड़ रुपये में) गैर-सरकारी क्षेत्र के ग्राहकों (एनजीएस) के लिए आईएमएफ दरें 25,000 तक 0.12 प्रतिशत, 25,000 से अधिक और 50,000 तक 0.08 प्रतिशत , 50,000 से अधिक और 1,50,000 तक तथा 0.06 प्रतिशत 1,50,000 से ऊपर 0.04 प्रतिशत होगा। पेंशन फंड द्वारा पीएफआरडीए को देय 0.015 प्रतिशत का वार्षिक नियामक शुल्क (एआरएफ) अपरिवर्तित रहेगा।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि नये नियमों से दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति परिणामों में सुधार होगा और वृद्धावस्था आय सुरक्षा में वृद्धि होगी।

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