
20 दिनों के अंदर दूसरी मौत
मंडला। फरवरी और मार्च में 20 दिन के अंदर एक नर और एक मादा बाघिन की मौत आपसी संघर्ष में हो गई है। विगत माह 18 फरवरी को वन अमले द्वारा गिद्ध गणना की जा रही थी, इसी दौरान 10 से 12 वर्ष की मादा बाघिन का शव मिला था। बाघिन की मौत भी आपसी संघर्ष के कारण बताई गई थी। अब 20 दिन बाद एक बार फिर कान्हा के सूपखार परिक्षेत्र में 4 से 5 वर्ष का नर बाघ भी आपसी संघर्ष का शिकार हो गया।
कान्हा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत सूपखार परिक्षेत्र के पटुवा बीट कक्ष क्रमांक 319 में एक नर बाघ मृत अवस्था में वन अमले को गश्ती के दौरान मिला। वन अमले द्वारा कार्यवाही करते हुए घटना स्थल को सुरक्षित किया गया व डॉग स्क्वाड की सहायता से घटना स्थल एवं उसके आस-पास छानबीन की गई।
बताया गया कि नर बाघ की मृत्यु आपसी संघर्ष के कारण हुई है। बाघ के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाये गये। मृत मिले बाघ पर एनटीसीए नई दिल्ली एवं कार्यालय मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक भोपाल से जारी दिशा निर्देश अनुरूप त्वरित कार्यवाही की गई। मृत बाघ के शरीर में चोट के निशान थे, जो प्राथमिक जांच में बाघों के बीच आपसी संघर्ष से मौत का कारण बताया जा रहा है। आपसी संघर्ष में जबड़े के नीचे की हड्डी टूटने से चोट के निशान मिले है।
पीएम कर किया अंतिम संस्कार
पार्क प्रबंधन ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की गाइडलाइन के अनुसार मृत बाघ के शव पर कार्रवाई की। बाघ के शव का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. राकेश वारेश्वा ब्लाक विटनरी अधिकारी बिरसा के द्वारा किया गया है। पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बाघ के शव का संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
