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इंदौर. शहर में महिला के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी लोन निकालने वाले संगठित गिरोह का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है. इस मामले में फायनांस कंपनी के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर और कर्मचारी की मिलीभगत सामने आई है, जिन्होंने सह-आरोपी महिला के साथ मिलकर 40 हजार रुपए का लोन हड़प लिया और पीड़िता को डिफाल्टर बना दिया.
जूनी इंदौर निवासी अमरीन बैग जुलाई 2025 में अपने पति के साथ एक शोरूम पर वाशिंग मशीन फायनांस कराने पहुंचीं, जहां लोन रिजेक्ट होने पर उन्हें पता चला कि उनके नाम पर पहले से ही 40 हजार रुपए का लोन चल रहा है और किश्तें न चुकाने के कारण उनका सिबिल स्कोर खराब हो चुका है. पीड़िता ने जब फायनांस कंपनी से लोन के दस्तावेज निकलवाए तो सामने आया कि केवाईसी दस्तावेज तो उनके थे, लेकिन लोन के समय ली गई फोटो और बैंक खाता किसी अन्य महिला अमरीन खान का था. जांच में खुलासा हुआ कि 28 दिसंबर 2023 को कंपनी के तत्कालीन सीएसआर राहुल कुमार पोरवाल ने लोन के नाम पर पीड़िता के दस्तावेज लिए और आपराधिक साजिश के तहत दूसरी महिला की फोटो और बैंक डिटेल अपलोड कर दी. इसके बाद तत्कालीन ब्रांच मैनेजर दिलीप यादव ने बिना उचित सत्यापन के लोन को मंजूरी दे दी. महज दो दिन में 30 दिसंबर 2023 को 40 हजार रुपए का लोन पास कर राशि सह-आरोपी के खाते में ट्रांसफर कर दी गई. डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश त्रिपाठी ने बताया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है. गिरोह के अन्य लिंक और संभावित मामलों की भी पड़ताल की जा रही है.
