
सीहोर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ द्वारा जिला एवं विकासखंड स्तरीय कार्यकारिणी का पुनर्गठन करते हुए नई जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया. इस दौरान प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर 2 जून से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल में सक्रिय भागीदारी का संकल्प भी लिया गया. हड़ताल के पहले ही दिन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर दिखाई देने लगा, जिससे टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं सहित कई कार्यक्रम प्रभावित हुए.
बैठक में सर्वसम्मति से हरिओम मेवाड़ा को जिलाध्यक्ष तथा रुचिरा उइके को जिला महिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया. नवनियुक्त कार्यकारिणी में सीमा यादव, रजनी सागर, हरिओम शिवहरे एवं डॉ. रूही दुबे को उपाध्यक्ष, नितेश बातव को सचिव, अमित त्रिपाठी को सह-सचिव, अरविंद यादव को कोषाध्यक्ष, रोहित सिसोदिया को मीडिया प्रभारी, धर्मेंद्र यादव को संगठन मंत्री तथा अजय ठाकुर को कार्यालय मंत्री बनाया गया. वहीं डॉ. दीपक डेहरिया, अम्बर मालवीय, मनीष दुबे एवं तरुण राठौर को संरक्षक मंडल में शामिल किया गया. बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि संविदा कर्मचारियों की विभिन्न मांगें वर्षों से लंबित हैं. शासन और प्रशासन को कई बार ज्ञापन एवं निवेदन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया. इसी कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
संघ के अनुसार जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 502 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी कार्यरत हैं, जो स्वास्थ्य संस्थानों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण कार्यक्रमों, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियानों, रोग नियंत्रण गतिविधियों तथा ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. संगठन का दावा है कि जिले के अधिकांश संविदा कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन पर असर पड़ सकता है.
जिलाध्यक्ष हरिओम मेवाड़ा ने कहा कि संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा और लंबित मांगों के समाधान तक संगठन का संघर्ष जारी रहेगा. वहीं जिला महिला अध्यक्ष रुचिरा उइके ने महिला कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का आव्हान किया.
बैठक एवं आंदोलन संबंधी कार्यक्रम का संचालन मनीष दुबे और तरुण राठौर ने किया. उन्होंने कर्मचारियों को हड़ताल की रूपरेखा, संगठन की रणनीति तथा विभिन्न मांगों की जानकारी देते हुए आंदोलन को सफल बनाने के लिए एकजुट रहने की अपील की बैठक का समापन कर्मचारियों की एकता और अधिकारों से जुड़े नारों के साथ हुआ.
पहले ही दिन दिखा हड़ताल का असर
अपनी मांगों को लेकर की जा रही संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल के पहले ही दिन जिले के कई ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित गतिविधियां प्रभावित रहीं. टीकाकरण सत्र, स्वास्थ्य सर्वेक्षण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की मैदानी गतिविधियों तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में व्यवधान की स्थिति बनी. यदि हड़ताल लंबी चली तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका और अधिक असर पडऩे की संभावना जताई जा रही है.
हड़ताली कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
मुख्यमंत्री द्वारा 30 जनवरी 2026 को की गई नियमितीकरण संबंधी घोषणा का क्रियान्वयन. सामान्य प्रशासन विभाग की नीति-2023 के अनुसार एनपीएस एवं स्वास्थ्य बीमा का लाभ. अन्य राज्यों की तर्ज पर 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि. नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता. सीएचओ के वेतन में पीबीआई समायोजित कर पूर्ववत प्रोत्साहन राशि। वेतन विसंगतियों का पुन: परीक्षण एवं संशोधन. नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश सुविधाएं. समान कार्य के लिए समान वेतन एवं सुविधाएं तथा आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर रोक.
