
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने हरदा जिले में एक सरकारी स्कूल को नौ किमी. दूर शिफ्ट किये जाने को चुनौती देने वाले मामले को गंभीरता से लिया। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने मामले में राज्य सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। इसके साथ ही युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित की है।
यह जनहित का मामला हरदा के स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद भोरगा, समाजसेवी मुकेश चौहान और ग्राम पंचायत मोहल कलां की सरपंच मनीषा आमे की ओर से दायर किया गया है। जिसमें याचिकाकर्ताओं ने डीईओं के आदेश को तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि यह बच्चों के मौलिक अधिकारों और शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हरदा के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के तहत कई गांवों के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को 9 किलोमीटर दूर स्थित संदीपनि स्कूलए खिरकिया में विलय कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस फैसले से ग्रामीण और गरीब परिवारों के सैकड़ों बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। छोटे बच्चों के लिए रोजाना 9 किलोमीटर दूर स्कूल जाना व्यावहारिक नहीं है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
