शेयर मार्केट में आज फिर से भारी बिकवाली देखने को मिली है। सेंसेक्स 322 अंक टूटकर 74000 के नीचे खुला है। वहीं निफ्टी भी 153 अंकों के भारी नुकसान के साथ 23229 पर कारोबार कर रहा है।
मंगलवार 2 जून को शेयर मार्केट की शुरुआत बहुत भारी गिरावट के साथ हुई है। BSE का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 322 अंकों के नुकसान के साथ 73945 के स्तर पर खुला है। शेयर बाजार के इस भारी नुकसान ने आज सुबह से ही आम निवेशकों की भारी चिंता को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। लगातार हो रही इस भारी बिकवाली से बाजार में काफी निराशा का माहौल स्पष्ट रूप से बना हुआ है।
NSE के 50 शेयरों वाले बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी ने भी आज गिरावट के शतक के साथ अपने कारोबार की शुरुआत की है। निफ्टी आज सुबह 153 अंकों की गिरावट के साथ 23229 के कमजोर स्तर पर खुला है। गिफ्ट निफ्टी भी लगभग 23312 के स्तर पर कारोबार कर रहा था जो भारतीय बाजार के लिए एक नकारात्मक शुरुआत का संकेत था। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आ रहे लगातार कमजोर संकेतों का सीधा असर आज भारत के शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है।
एशियाई बाजारों का कमजोर हाल
एशियाई बाजार भी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर अनिश्चितता के बीच भारी गिरावट के साथ लगातार कारोबार कर रहे हैं। जापान का प्रमुख निक्केई इंडेक्स 0.52 प्रतिशत और टॉपिक्स 0.98 प्रतिशत बुरी तरह से टूट गया है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.32 प्रतिशत और कोस्डैक इंडेक्स 2.5 प्रतिशत तक लुढ़क कर काफी ज्यादा नीचे आ गया है।
सेंसेक्स निफ्टी का पूर्वानुमान
कोटक सिक्योरिटीज के श्रीकांत चौहान के अनुसार आज दिन के कारोबारियों के लिए 74500 का स्तर अहम रहेगा। इस स्तर के नीचे रहने पर गिरावट की लहर जारी रह सकती है और सेंसेक्स 73700 तक फिसल सकता है। अगर बाजार 74500 के ऊपर जाता है तो यह तकनीकी उछाल 75000 के स्तर तक भी आसानी से पहुंच सकता है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी को अपने 50-डीएमए के पास 23690 पर एक बहुत मजबूत प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है। निफ्टी का पिछला स्विंग लो 23262 आज के बाजार में तत्काल सपोर्ट के रूप में मुख्य रूप से कार्य करेगा। इसके नीचे निर्णायक रूप से बंद होने पर बिकवाली का भारी दबाव निफ्टी को 23150 के स्तर की ओर खींच सकता है।
वैश्विक और घरेलू कारण
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के स्थगित होने की अहम खबरों ने पूरे ग्लोबल मार्केट को प्रभावित किया है। युद्ध की अनिश्चितता के चलते आज कच्चे तेल की कीमतें भी अपने पिछले सत्र की तेज बढ़त को बनाए हुए हैं। इसके अलावा भारत का राजकोषीय घाटा भी दोगुना होकर 3.62 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है जो बहुत चिंताजनक है।
