नयी दिल्ली 01 जून (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को यहां राष्ट्रपति भवन में म्यांमार राष्ट्रपति यू मिन आंग हलिंग का स्वागत किया और कहा कि म्यांमार दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेश द्वार है।
भारत की पांच दिन की यात्रा पर आये म्यांमार के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति हलिंग का स्वागत करते हुए, कहा कि भारत और म्यांमार के बीच गहरे सांस्कृतिक, सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंध हैं, जो सदियों पुराने हैं।
उन्होंने कहा ,” हमारे संबंध आपसी समझ और मित्रता की एक मजबूत नींव पर टिके हैं। म्यांमार दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेश द्वार है, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा आसियान देश है जिसकी सीमा भारत से मिलती है। यह भारत की ‘पड़ोसी पहले’, “एक्ट ईस्ट” और “महासागर” नीतियों में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।
राष्ट्रपति ने म्यांमार के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने पर राष्ट्रपति हलिंग को बधाई दी और कहा कि भारत अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने के लिए नई सरकार के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक है। उन्होंने कहा कि भारत, म्यांमार सरकार के प्रयासों में उसकी प्राथमिकताओं के अनुरूप सहयोग देने के लिए तत्पर है। उन्होंने म्यांमार में शांति और सुलह की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के प्रति भारत के अटूट समर्थन को व्यक्त किया।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ‘कनेक्टिविटी’ भारत-म्यांमार साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, और उन्होंने आशा व्यक्त की कि म्यांमार सरकार के सहयोग से चल रही कनेक्टिविटी परियोजनाएं जल्द से जल्द पूरी हो जाएंगी।
राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत-म्यांमार व्यापार संबंध फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में विस्तृत हुए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि द्विपक्षीय व्यापार अभी भी अपनी पूरी क्षमता से कम है, और हम इसे और अधिक बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।
दोनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत और म्यांमार के बीच मित्रता और अधिक मजबूत होती जाएगी।
