
कटनी। कटनी वासियों द्वारा लंबे समय से किए जा रहे लगातार विरोध और आपत्तियों को दरकिनार करते हुए आखिरकार जिले में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर ही मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। कछगवां क्षेत्र के पास चिह्नित 25 एकड़ की विशाल भूमि पर इस प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की स्थापना का काम अब गुपचुप तरीके से बेहद तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार और स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के बीच हुआ है अनुबंध
कटनी में पीपीपी (PPP) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाने का प्रस्ताव है, जिसके तहत मध्य प्रदेश सरकार और स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के बीच बाकायदा अनुबंध हुआ था। हालांकि, इस अनुबंध के सामने आने के बाद से ही इसे पूरी तरह से शासकीय (सरकारी) मेडिकल कॉलेज बनाने की मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी विरोध भी हुआ है। जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों का स्पष्ट कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा को निजी हाथों में सौंपने के बजाय सरकार को खुद जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
ग्राउंड जीरो की स्थिति: बाउंड्री वॉल का काम जोरों पर, बैचिंग प्लांट हुआ स्थापित
निर्माण स्थल से सामने आई मौजूदा स्थिति के अनुसार, वर्तमान में साइट को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्री वॉल (परिसीमा दीवार) का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। स्थानीय सूत्रों और वहां कार्यरत मजदूरों के मुताबिक, इस बाउंड्री वॉल के निर्माण का ठेका मोहम्मद तमीम खान को सौंपा गया है।
परियोजना की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निर्माण स्थल पर कंक्रीट मिक्सिंग के लिए बैचिंग प्लांट लगाया जा चुका है। इसके साथ ही भारी मात्रा में लोहा, रेत समेत अन्य आवश्यक निर्माण सामग्री का स्टॉक भी जमा कर लिया गया है। निर्माण कार्य अनवरत चलता रहे, इसके लिए मजदूरों के रहने हेतु क्वार्टर भी तैयार कर दिए गए हैं।
बिना औपचारिक घोषणा के अचानक शुरू हुआ काम, सरकारी मोड की मांग पर अड़ी जनता
गौरतलब है कि कटनी के नागरिक और विभिन्न संगठन इस परियोजना को निजी हाथों में सौंपने का शुरू से ही कड़ा विरोध कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के भूमिपूजन के लिए सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दो बार कार्यक्रम तय हुआ था, लेकिन जनता के भारी विरोध और आक्रोश को देखते हुए दोनों ही बार मुख्यमंत्री कटनी नहीं पहुंचे।
राजनेता और प्रशासनिक अमला भले ही भूमिपूजन की औपचारिक घोषणा से बचता रहा, लेकिन अब बिना किसी शोर-शराबे और वीआईपी आयोजन के अचानक निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कटनी में मेडिकल कॉलेज की स्थापना का स्वागत करते हैं, लेकिन इसे पीपीपी मॉडल के बजाय पूरी तरह शासकीय (सरकारी) मोड में बनाया जाना चाहिए, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग को भी सस्ती व बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
भविष्य की उम्मीदें और आशंकाएं
तकनीकी रूप से यह महत्वाकांक्षी परियोजना कटनी जिले और महाकौशल क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही शहर में डॉक्टरी की पढ़ाई के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मुनाफे पर आधारित पीपीपी मॉडल को लेकर जनता के मन में व्याप्त आशंकाएं और असंतोष की चिंगारी अभी भी ठंडी नहीं हुई है।
