विराट स्वरूप से जीवंत होगी दिव्य गाथा

उज्जैन: बाबा महाकाल की नगरी अब केवल शिवमय ही नहीं, बल्कि कृष्णमय वैभव की भी नई पहचान गढ़ने जा रही है. सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन में एक ऐसे भव्य कृष्ण लोक के निर्माण की तैयारी चल रही है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं, मित्रता, शिक्षा और गीता के संदेश को आधुनिक और आध्यात्मिक स्वरूप में साकार किया जाएगा.

योजना के अनुसार यूनिटी मॉल के पीछे स्थित विस्तृत क्षेत्र में एक विशाल विराट स्वरूप प्रतिमा स्थापित की जाएगी. यह प्रतिमा ओंकारेश्वर में स्थापित विराट स्वरूप की तर्ज पर होगी, जिसमें देव, दानव, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, मानव, जीव-जंतु और समस्त सृष्टि के तत्वों को समाहित कर भगवान के विराट दर्शन कराए जाएंगे. यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनेगी.

महाकाल लोक की तर्ज पर निर्माण
कृष्ण लोक का निर्माण महाकाल लोक की तर्ज पर किया जाएगा, फर्क इतना रहेगा कि इसकी गाथा श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन में बसाई जाएगी. यहां सांदीपनि आश्रम में बिताए गए श्रीकृष्ण के छात्र जीवन, 64 दिनों में 64 कलाओं के अध्ययन, बलराम और सुदामा के साथ उनकी मित्रता, बाल लीलाओं तथा गीता के अमर संदेशों को भव्य कलाकृतियों, संग्रहालयों, सांस्कृतिक केंद्रों और आधुनिक प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत किया जाएगा.

श्री कृष्ण ने उज्जैन में ली शिक्षा
धार्मिक दृष्टि से भी यह परियोजना विशेष महत्व रखती है. उज्जैन वह भूमि है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की थी. ऐसे में कृष्ण लोक केवल एक पर्यटन केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और मित्रता के आदर्शों का जीवंत तीर्थ बनेगा.

सीएम के सामने जाएगी योजना
बताया जा रहा है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रारंभिक रूपरेखा तैयार कर ली है और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. प्रस्ताव को जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा. स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य गति पकड़ सकता है.

श्रद्धालु भ्रमण करेंगे
सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए शहर में लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा है. अनुमान है कि करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संत और पर्यटक उज्जैन पहुंचेंगे. ऐसे में महाकाल मंदिर, महाकाल लोक, 13 अखाड़ों और अन्य धार्मिक स्थलों के साथ कृष्ण लोक भी श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक भ्रमण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा.

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