इंदौर: शहर के मध्य स्थित जिंसी हाट मैदान को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत आधुनिक सब्जी बाजार के रूप में विकसित करने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे. दावा किया गया था कि यहां व्यापारियों को धूप, बारिश और यातायात की समस्याओं से राहत मिलेगी तथा सड़क किनारे लगने वाले असंगठित बाजारों को व्यवस्थित किया जाएगा. इसके लिए शेड, कैनोपी, ओटले और अन्य सुविधाएं विकसित की गईं, लेकिन योजना धरातल पर टिक नहीं सकी.
निगम और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही, कमजोर निगरानी और रखरखाव के अभाव ने कुछ ही वर्षों में पूरे प्रोजेक्ट की हालत बिगाड़ दी. जिस बाजार को शहर के मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में पेश किया गया था, वह आज उजाड़ पड़ा है और करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई सुविधाएं उपयोग के अभाव में जर्जर हो चुकी हैं.
पांच साल की अनदेखी शुरू होते ही खत्म हुई उखड़ गई करोड़ों की चमक
स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण कार्य की गुणवत्ता शुरू से ही सवालों के घेरे में रही. स्मार्ट सिटी की महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में विकसित जिंसी हाट मैदान कुछ ही वर्षों में बदहाली का शिकार हो गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी की गई, जिसके चलते कैनोपी फट गईं, शेड क्षतिग्रस्त हो गए और टाइलें उखड़ने लगीं. वर्षों तक रखरखाव नहीं होने से स्थिति और खराब होती गई. मूलभूत सुविधाएं खत्म होने के कारण व्यापारी यहां से दूर हो गए और करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया यह बाजार आज लगभग वीरान पड़ा है. लोगों का कहना है कि निगम की लापरवाही और कमजोर निगरानी ने इस परियोजना को बदहाली का प्रतीक बना दिया है.
मैदान की बड़ी समस्या बढ़ता अतिक्रमण
हाट मैदान के आसपास और उससे लगी सड़कों पर अवैध कब्जों की भरमार है. नगर निगम ने समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया. परिणामस्वरूप क्षेत्र में आए दिन जाम की स्थिति बनती है और आम नागरिकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है. यहाँ के अन्य व्यापारियों का भी कहना है कि अतिक्रमण के कारण बाजार की उपयोगिता लगातार कम होती जा रही है.
असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता मैदान
स्थानीय नागरिकों के अनुसार मैदान की उपेक्षा का फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं. शाम होते ही यहां सुनसान जगह पर माहौल बन जाता है. गंदगी, टूटे ढांचे और अव्यवस्थित स्थिति चारों ओर फैली गंदगी और रखरखाव की कमी ने इस पूरे क्षेत्र की छवि को प्रभावित किया है.
पुराने प्रोजेक्ट की सुध नहीं, नए विकास की तैयारी
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि नगर निगम और संबंधित एजेंसियां पुराने प्रोजेक्ट को संवारने के बजाय नए विकास कार्यों की योजनाओं पर विचार कर रही हैं. लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस प्रोजेक्ट को पहले पुनर्जीवित किया जाना चाहिए. यदि समय रहते रखरखाव किया जाता तो आज यह बाजार शहर के सबसे व्यवस्थित व्यापारिक केंद्रों में शामिल हो सकता था.
सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि जिंसी हाट मैदान की वर्तमान स्थिति सीधे तौर पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को दर्शाती है. उन्होंने कहा एक आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई का हिस्सा कर के रूप में इसलिए देता है ताकि उसका उपयोग शहर के विकास में हो. जिंसी हाट मैदान में बिना पर्याप्त योजना और उपयोगिता का आकलन किए करोड़ों रुपये खर्च किए गए. निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी रही, जिसके कारण कुछ ही वर्षों में पूरी संरचना जर्जर हो गई. यदि निर्माण और रखरखाव में जवाबदेही तय होती तो आज यह परियोजना इस स्थिति में नहीं होती. अधिकारियों की अनदेखी और घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग इसकी प्रमुख वजह है.
निगम जल्द करेगा पुनर्जीवित करने का प्रयास
नगर निगम के अपर आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के सीईओ अर्थ जैन ने बताया कि जिंसी हाट मैदान स्थित सब्जी बाजार के पुनर्विकास और संचालन के प्रस्ताव को जल्द ही बोर्ड बैठक में रखा जाएगा. उन्होंने कहा पुरानी परियोजना को नई कार्ययोजना के अनुरूप पुनः विकसित करने पर विचार किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता में शामिल किया जाएगा ताकि इसे दोबारा उपयोगी बनाया जा सके.
हर रविवार हाट को बाजार परिसर में शिफ्ट करने की तैयारी
नगर निगम के अपर आयुक्त आकाश सिंह ने बताया कि जिंसी क्षेत्र में लगने वाले साप्ताहिक हाट को बाजार परिसर में शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने कहा जिंसी हाट मैदान में बने बाजार को जल्द शुरू करने का प्रयास किया जाएगा. वर्तमान में यहां अवैध पार्किंग, लोडिंग वाहनों का अतिक्रमण और अन्य बाधाएं हैं, जिन्हें हटाने के लिए कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद प्रत्येक रविवार लगने वाले हाट को इसी परिसर में संचालित करने की योजना है. शेष दिनों में नियमित सब्जी बाजार शुरू करने के लिए व्यापारियों से चर्चा की जाएगी. आकाश सिंह ने बताया कि पूर्व में बनाई गई दुकानों की मार्किंग लगभग 6 बाय 4 फीट थी, जो सब्जी विक्रेताओं के लिए पर्याप्त नहीं थी. अब इसे बढ़ाकर लगभग 10 बाय 5 फीट करने का प्रस्ताव है. साथ ही उखड़ी टाइल्स, क्षतिग्रस्त शेड और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत के लिए भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है.
आम जनता के सवाल जो जवाब मांगते हैं
– करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना इतनी जल्दी जर्जर क्यों हो गई?
– निर्माण कार्य की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार कौन था?
– रखरखाव व्यवस्था क्यों विफल हुई?
– बार-बार अतिक्रमण हटाने के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं निकला?
– क्या नगर निगम इस बाजार को फिर से व्यापारियों और नागरिकों के लिए उपयोगी बना पाएगा?
उपेक्षा व खराब रखरखाव का उदाहरण
जिंसी हाट मैदान सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की जमीनी हकीकत का आईना बनता जा रहा है. जिस स्थान को शहर के व्यवस्थित विकास का प्रतीक बनना था, वह आज उपेक्षा, अतिक्रमण और खराब रखरखाव का उदाहरण बन चुका है.
