सीहोर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है. परिवहन लागत बढऩे से रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं महंगी हो गई हैं. खाद्य तेल, दाल, शकर, सूजी, मैदा और बेसन समेत अन्य किराना सामग्री के दामों में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. व्यापारियों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात लंबे समय तक ऐसे बने रहे तो आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.
डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर वाहन चालकों के बजट पर भी पड़ा है. औसतन 30 लीटर पेट्रोल की मासिक खपत करने वाले दोपहिया वाहन चालकों पर 150 से 200 रुपए तक का अतिरिक्त भार आ गया है. वहीं 40 लीटर क्षमता वाली कार की टंकी फुल कराने पर करीब 210 रुपए अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं. लंबी दूरी तय करने वाले वाहन मालिकों और व्यावसायिक वाहन चालकों का मासिक खर्च 500 से 600 रुपए तक बढ़ गया है. बस संचालकों के अनुसार प्रत्येक 100 किलोमीटर की यात्रा पर अब करीब 123 रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है.
किराना व्यापारियों का कहना है कि युद्ध और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के कारण बाजार में भय का माहौल है. कई खाद्य वस्तुएं और खाद्य तेल विदेशों से आयात होते हैं. आपूर्ति प्रभावित होने और परिवहन लागत बढऩे से कीमतों में तेजी आई है. शहर के एक किराना व्यापारी मनोज गुजराती ने बताया कि मालभाड़ा बढऩे का सीधा असर किराना बाजार पर पड़ा है. शहर में तेल, शकर और अन्य प्रमुख किराना सामग्री बाहर से आती है, इसलिए परिवहन खर्च बढ़ते ही वस्तुओं के दाम भी बढ़ गए हैं.
ट्रांसपोर्टर ने बढ़ाया मालभाड़ा
डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते ट्रांसपोर्टरों ने माल ढुलाई दरों में भी वृद्धि कर दी है. पहले 50 किलोग्राम तक वजन वाले माल पर 60 रुपए प्रति नग भाड़ा लिया जाता था, जिसे बढ़ाकर 70 रुपए कर दिया गया है. इसी तरह 70 से 100 किलोग्राम वजन वाले माल पर पहले 100 रुपए प्रति नग भाड़ा लिया जाता था, जो अब 120 रुपए तक पहुंच गया है. ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि डीजल के बढ़ते दामों के कारण भाड़ा बढ़ाना मजबूरी बन गया है। हालांकि मालभाड़ा बढ़ाने की कोई अधिकृत घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अधिकांश ट्रांसपोर्टर बढ़ी हुई दरों पर ही माल ढुलाई कर रहे हैं.
