इंदौर:कांग्रेस इंदौर को बदनाम करने के कोशिश कर रही है. आज जारी पानी की जांच रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी और नियोजित है.उक्त बात महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी मीडिया से चर्चा के बाद कही. उन्होंने कहा कि शहर में करीब 650 टैंकरों से जनता को पानी देने का काम नगर निगम द्वारा किया जा रहा है और इंदौर में नर्मदा 360 एमएलडी पानी आ रहा है. शहर के कई इलाकों और 29 गांव के 10 वार्डो में नर्मदा लाइन नहीं होने एक बोरिंग सूखने से समस्या आई है.
महापौर ने आज कांग्रेस की मीडिया से चर्चा के बाद प्रेस वार्ता कर कहा कि शहर में कोई घटना, दुर्घटना या संकट आता है तो ऐसे समय में कांग्रेस हमेशा ओछी राजनीति करके शहर का नाम बदनाम करने की कोशिश करती है. उन्होंने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, विपक्ष अपनी बात रख सकता है और सुझाव भी दे सकता है, लेकिन कांग्रेस ने हमेशा शहर को बदनाम करने का काम किया है. महापौर ने कहा कि जीतू पटवारी और कांग्रेस पूरे शहर में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि बिजलपुर और मूसाखेड़ी में स्काडा सिस्टम लगा हुआ है, जिसके माध्यम से नर्मदा का कितना पानी फिल्टर होकर इंदौर पहुंच रहा है और टंकियों तक कितना पानी जा रहा है, उसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि इसी रिकॉर्ड के आधार पर नगर निगम करीब 360 एमएलडी से अधिक पानी शहरवासियों तक पहुंचा रहा है. इसके अलावा इस बार हजारों बोरिंग सूख गए हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां नर्मदा जल वितरण व्यवस्था नहीं है. महापौर ने आरोप लगाया कि कम पानी पहुंचाने और वितरण प्रबंधन को लेकर विपक्ष शहर को बूंद बूंद पानी के लिए तरसने वाला बताने की कोशिश कर रहा है, जो इंदौर शहर की बदनामी है.
महापौर ने कहा कि जीतू पटवारी और कांग्रेस ने राजवाड़ा पर प्रदर्शन कर यह दावा किया कि शहर का 90 प्रतिशत पानी जहरीला है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जीतू पटवारी अब पानी की टेस्टिंग के एक्सपर्ट और बड़े हाइड्रोलॉजिस्ट बन गए हैं. उन्होंने कहा कि जो शहर अपनी मेहनत से देश में सफाई में नंबर वन बना है और जिसे वाटर प्लस का दर्जा मिला है, उस शहर के पानी को जहरीला बताया जा रहा है. महापौर ने कहा कि रिपोर्ट में दिखाई गई तस्वीरों में प्लास्टिक की बोतलों में सैंपल इकट्ठा किए जा रहे हैं, जबकि एनएबीएल और भारत सरकार के मानकों के अनुसार पानी के सैंपल लेने की निर्धारित प्रक्रिया और मानक होते हैं. उन्होंने कहा कि सैंपल कांच के विशेष कंटेनर में लिए जाते हैं और निर्धारित समय के भीतर लैब तक पहुंचाना जरूरी होता है. ऐसे में प्रथम दृष्टया यह रिपोर्ट संदिग्ध और झूठी प्रतीत होती है.
महापौर ने रिपोर्ट पर उठाए सवाल
1. क्या 90′ क्षेत्र से सैंपल लिए गए?
2. केवल 29 वार्डों से लिए गए सैंपल?
3. रिपोर्ट तीन महीने तक क्यों दबाई कर रखी गई?
4. सैंपल लेने की प्रक्रिया पर सवाल?
जल संरक्षण के लिए सभी मिलकर लें संकल्प
महापौर ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा जल संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है और इस वर्ष बड़ी संख्या में बोरिंग सूखने के कारण सभी को मिलकर जल संरक्षण के लिए संकल्प लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि जल स्तर बढ़ाने और जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता है
