10 महीने की मेहनत, शोध के बाद बनाई प्लांट डॉक्टर डिवाईस

जबलपुर: फसलों को नुकसान से बचाने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के एम.टेक के छात्र आर्यन चंद्रा ने खोज कर ली है । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एम्बेडेड सिस्टम आधारित एक स्मार्ट डिवाइस विकसित की है। लगभग 10 महीने की मेहनत और शोध के बाद तैयार इस डिवाइस का नाम प्लांट डॉक्टर रखा गया है। प्लांट डॉक्टर एक पोर्टेबल स्टैंडअलोन एआई डिवाइस है, जो बिना इंटरनेट के खेतों में काम कर सकती है।

यह डिवाइस 10 प्रमुख फसलों की 56 प्रकार की बीमारियों की पहचान करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे उपयोग करने के लिए किसी तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। डिवाइस का उपयोग बेहद आसान है। किसान सबसे पहले टारगेट फसल का चयन करता है। इसके बाद कैमरे से प्रभावित पत्तियों या फसल की फोटो क्लिक की जाती है। कुछ ही सेकंड में डिवाइस एआई आधारित डायग्नोस्टिक रिपोर्ट तैयार कर देती है। रिपोर्ट में बीमारी की पहचान के साथ उपचार और दवाई संबंधी सुझाव भी दिए जाते हैं।
बिना इंटरनेट के भी करता है काम
ग्रामीण क्षेत्रों और खेतों में अक्सर इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्लांट डॉक्टर को पूरी तरह ऑफलाइन मोड पर डिजाइन किया गया है। यानी यह डिवाइस बिना इंटरनेट के भी पूरी क्षमता के साथ कार्य करती है। यह डिवाइस अलग-अलग फसलों में 88 प्रतिशत से लेकर 99 प्रतिशत तक एक्यूरेसी प्रदान करती है। अधिकतम 99 प्रतिशत तक की सटीकता इसे किसानों के लिए बेहद उपयोगी बनाती है।
कृषि क्षेत्र में नई संभावना
प्लांट डॉक्टर जैसे नवाचार भारतीय कृषि को आधुनिक तकनीक से जोडऩे का प्रभावी उदाहरण हैं। यह डिवाइस न केवल किसानों का समय और पैसा बचा सकती है, बल्कि गलत दवा उपयोग को कम कर उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकती है।

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