नयी दिल्ली, 27 मई (वार्ता) राजधानी दिल्ली में गुरूवार से शुरू हो रहे राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन , खरीफ 2026 में खरीफ सीजन की तैयारी, राज्यों के साथ समन्वय और किसान-केंद्रित नीति क्रियान्वयन जैसे गंभीर मसलों पर विचार विमर्श होगा । इसके साथ ही दलहन, तिलहन, बागवानी, बीज, प्राकृतिक खेती, जलवायु-सहिष्णु कृषि, कृषि ऋण, फसल बीमा, पीएम – आशा, डिजिटल एग्रीकल्चर और राज्यों के अनुभवों पर विस्तार से बातचीत होगी।
यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि इसमें कई राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह सम्मेलन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर आगामी खरीफ फसल के लिए देशव्यापी तैयारी को और अधिक प्रभावी, समन्वित तथा परिणाम देने वाली बनाने के उद्देश्य से 28–29 मई को “नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एग्रीकल्चर फॉर खरीफ कैंपेन 2026” के नाम से यहां आयोजित किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार खरीफ 2026 को केवल एक मौसमी अभियान के रूप में नहीं, बल्कि उत्पादन वृद्धि, फसल विविधीकरण, जलवायु-सहिष्णु कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसान समृद्धि से जुड़े व्यापक राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में देख रही है।
सम्मेलन में गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत द्वारा प्राकृतिक खेती पर विशेष संबोधन भी प्रस्तावित है। इसके बाद विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के सुझाव लिए जाएंगे, जिससे यह आयोजन एक तरफा प्रस्तुति तक सीमित न रहकर वास्तविक अनुभवों, क्षेत्रीय चुनौतियों और राज्यों की अपेक्षाओं पर आधारित साझा राष्ट्रीय विमर्श का रूप ले सके।
सम्मेलन में बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, गुजरात, कर्नाटक, त्रिपुरा, तेलंगाना, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, सिक्किम, नागालैंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम सहित कई राज्यों के मंत्री उपस्थित रहेंगे। बिहार से विजय कुमार सिन्हा, महाराष्ट्र से दत्तात्रेय विठोबा भरणे, ओडिशा से कनक वर्धन सिंह देव, गुजरात से जीतूभाई सावजीभाई वाघानी, पंजाब से गुरमीत सिंह खुड्डियां, उत्तर प्रदेश से सूर्य प्रताप शाही, हरियाणा से श्याम सिंह राणा और राजस्थान से किरोड़ी लाल मीणा आदि शामिल होंगे।
