ट्विशा शर्मा केस: पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

जबलपुर: भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा की दहेज हत्या के अपराध में आरोपी सास तथा पूर्व भोपाल जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ प्रदेश सरकार तथा मृतिका के पिता की तरफ से दायर की गयी याचिकाओं पर हाईकोर्ट में बुधवार को लगभग पौने तीन घंटे तक सुनवाई हुई। इस दौरान सीबीआई ने भी अग्रिम जमानत निरस्त किये जाने के संबंध में आवेदन दायर किया। हाईकोर्ट जस्टिस जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किये हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की तरफ से भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह की मॉडल पत्नी ट्विशा शर्मा की 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी थी। गिरिबाला सिंह को दहेज हत्या के अपराध में जिला न्यायालय से 15 अप्रैल को अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया था। अग्रिम जमानत निरस्त किये जाने की मांग करते हुए प्रदेश सरकार व मृतिका के पिता नवनिधि शर्मा की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। सुनवाई के दौरान तर्क दिया गया कि वह अग्रिम जमानत की शर्त अनुसार जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं ।

पुलिस ने उन्हें 13 मई से 23 मई के बीच पांच नोटिस दिये थे। इसके अलावा उन्होंने 18 मई को प्रेस कांफ्रेंस कर मृतिका के चरित्र पर गंभीर आरोप लगाये थे। वह भौतिक साक्ष्य जांच एजेन्सी को उपलब्ध नहीं करवाते हुए नष्ट कर रही है। घटना के बाद ट्विशा को नीचे लाने का वीडियो वायरल हुआ था। पूरे वीडियो का सिर्फ उक्त हिस्सा ही मीडिया में जारी किया गया। जिसमें नीचे लाते समय उसे रास्ते में सीपीआर दिया जा रहा था। घटना के बाद 50 मिनट का समय उसे नीचे लाने में लगा था। उसे नीचे लाने की बजाये तत्काल समीप स्थित अस्पताल को सूचित किया जाता तो समय पर उपचार मिलने के कारण उसकी जान को बचाया जा सकता था।
याचिकाकर्ताओं की तरफ से बताया गया कि केस डायरी के अनुसार ट्विशा के 20 लाख रुपये के शेयर गिरिबाला सिंह तथा उनका बेटे समर्थ सिंह अपने नाम पर करवाना चाहते थे। शादी के एन वक्त पर मायके पक्ष के द्वारा मांग करने पर दो लाख रुपये दिये थे। उनकी हैसियत के अनुसार दहेज नहीं लाने का ताना मॉ-बेटे के द्वारा ट्विशा को दिया जाता था।
मॉ-बेटी की तरफ से अग्रिम जमानत के लिए एफआईआर दर्ज होने के पहले ही 14 मई को आवेदन दायर कर दिया गया था। एफआईआर दर्ज होने के कुछ घंटो बाद ही गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया। न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई किये जाने की बजाय मिनी ट्रायल किया गया है। अग्रिम जमानत के आवेदन के साथ ट्विशा की सभी मेडिकल रिपोर्ट, व्हाट्सएप चैट तथा यूपीआई के माध्यम के उसके बैंक खाते में डाले गये स्क्रीन शॉट भी प्रस्तुत किये गये थे।
सीबीआई की तरफ से इंटर विनर बनने का आवेदन पेश करते हुए अग्रिम जमानत याचिका निरस्त करने मांग की गयी। सीबीआई के तरफ से तर्क दिया गया कि ट्विशा के पहले पोस्टमार्टम के दौरान गिरिबाला सिंह की रिश्ते में लगने वाली बहन व एक अन्य व्यक्ति मौजूद था। जिन्हे उपस्थित नहीं रहना चाहिए था और यह जांच का विषय है। इसके अलावा दोनों आरोपियों के क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए उनकी अभिरक्षा आवष्यक है।
अनावेदिका गिरिबाला सिंह की तरफ से तर्क दिया गया कि डॉक्टरों ने एंजायटी, ड्रग्स के कारण उसकी स्थिति को देखते हुए गर्भपात की गोलियां दी थी। ट्विशा अकेले रहना चाहती थी और जिस मंजिल में उसने फांसी लगाई वही उसका किचन, बाथरूम व बेडरूम था। घटना के दूसरे दिन 13 तारीख को पुलिस ने उसे सीज कर दिया था। गिरिबाला सिंह तथा उसके बेटे ने यूपीआई के माध्यम से शादी के बाद ट्विशा को सात लाख रुपये से अधिक दिये है। ट्विशा ने कभी भी अपनी सास पर दहेज मांगने तथा प्रताड़ित करने की बात मायके पक्ष वालों से नहीं कही थी। उसके सभी आरोप अपने पति के खिलाफ है। इसके अलावा वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है। सीसीटीवी का पासवर्ड नहीं होने के कारण उन्होंने टेक्नीशियन को बुलाया था। पासवर्ड नम्बर लेकर सभी रिकॉर्डिंग उन्हे सौंप दी थी। वायरल वीडियो उसी फुटेज से रिकॉर्ड कर मीडिया में जारी किया गया है। उनकी तरफ से उम्र का हवाला देते हुए कहा गया कि उनके खिलाफ कोई आरोप संबंधित कोई साक्ष्य नहीं है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि उम्र, स्थानीय न्यायिक तथा फरार होने का तर्क जमानत का आधार नहीं है। पूर्व में भी हाईकोर्ट अग्रिम जमानत को निरस्त करने के आदेश पारित कर चूका है। जांच के लिए उन्हें अभिरक्षा में लेना आवश्यक है। सुनवाई के बाद एकलपीठ ने फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये।

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