बागेश्वर धाम से लौट रहे बुजुर्ग की मौत, समय पर एंबुलेंस न मिलने पर ऑटो से ले जाना पड़ा अस्पताल

छतरपुर: जिले में जारी भीषण गर्मी और जानलेवा लू के बीच बागेश्वर धाम के दर्शन कर लौट रहे एक 67 वर्षीय बुजुर्ग तीर्थयात्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक मूल रूप से रीवा जिले के रहने वाले थे और अपने परिवार व ग्रामीणों के साथ चारधाम यात्रा पर निकले थे। ओरछा जाते समय रास्ते में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल सका। परिजन एक बैटरी वाले ऑटो रिक्शा से उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
रीवा से 45 लोगों के जत्थे के साथ निकले थे यात्रा पर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान भाई लाल तिवारी (67) निवासी रीवा के रूप में हुई है, जो एक रिटायर्ड शासकीय कर्मचारी थे। वे अपने परिवार और क्षेत्र के करीब 40 से 45 लोगों के जत्थे के साथ 21 मई को चारधाम यात्रा के लिए घर से रवाना हुए थे। पन्ना में दर्शन करने के बाद यह पूरा जत्था छतरपुर जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बागेश्वर धाम पहुंचा था। यहाँ दर्शन लाभ लेने के बाद सभी लोग बस द्वारा अपने अगले गंतव्य ओरछा के लिए रवाना हुए थे।
रास्ते में खाना बनाते समय अचानक बढ़ा शरीर का तापमान
मृतक की पत्नी गायत्री तिवारी, दामाद दिनेश शर्मा और जीजा प्रभाकर दुबे ने बताया कि ओरछा मार्ग पर रास्ते में बस को रोककर सभी सहयात्री खाना बनाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान भाई लाल तिवारी की तबीयत अचानक बेहद खराब हो गई। उन्हें तेज बुखार के साथ घबराहट और शरीर में तेज कंपकंपी होने लगी। परिजनों ने तत्काल प्राथमिक उपचार के तौर पर उन्हें नींबू पानी पिलाया और राहत देने के लिए माथे पर गीली पट्टियां भी रखीं, लेकिन अत्यधिक गर्मी के कारण उनके शरीर का तापमान लगातार बढ़ता ही चला गया।
समय पर नहीं मिली एंबुलेंस, ऑटो से पहुंचे अस्पताल
परिजनों का आरोप है कि फोरलेन सड़क पर काफी दूर तक उन्हें कोई अस्पताल या प्राथमिक चिकित्सा केंद्र नजर नहीं आया। उन्होंने तुरंत एंबुलेंस बुलाने के लिए फोन किया और काफी प्रयास किए, लेकिन लंबे समय तक कोई सरकारी मदद या एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच सकी। स्थिति बिगड़ती देख परिजनों ने बागेश्वर धाम की तरफ से आ रहे एक बैटरी चालित ऑटो रिक्शा को रोका और चालक से मदद मांगी। इसके बाद बीमार बुजुर्ग को ऑटो में बैठाकर करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर छतरपुर जिला अस्पताल लाया गया। अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना के बाद तीर्थयात्रियों के जत्थे और परिवार में कोहराम मच गया है।

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