सीवर लाइन निर्माण से क्षतिग्रस्त सडक़ो का रेस्टोरेशन का काम अधर में

रीवा। रीवा शहर के अंदर सीवर लाइन और पेयजल पाइप लाइन के लिये मोहल्लो की कंक्रीट सडक़ो को खोद कर फेंक दिया गया. अपना काम करने के बाद कम्पनी ने ऊपर से मिट्टी और पत्थर डाल दिया, लेकिन सडक़ो का सही तरीके से रेस्टोरेशन नही किया किया. लिहाजा आने वाली बरसात में क्षतिग्रस्त सडक़े दुर्घटना का कारण बनेगी और लोगो के घरो में पानी भरेगा. कई किलो मीटर सडक़ रेस्टोरेशन का कार्य बचा हुआ है, निगम आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान बरसात के पहले रेस्टोरेशन का कार्य पूरा करने के निर्देश दिये. लेकिन कम्पनी कछुआ गति से काम कर रही है. अगर काम की गति यही रही तो बरसात के पहले रेस्टोरेशन का काम नही हो पाएगा. शहर के वार्ड 43, 44, 32, 4, 5 सहित विभिन्न वार्डो में सीवर लाइन के दौरान सडक़ क्षतिग्रस्त हुई, उसमें मिट्टी और कंक्रीट के टुकड़े डाल कर छोड़ दिये गये. जबकि अनुबंध के मुताबिक सडक़ को उसी तरह बनाकर देना था जैसे खोदने के पहले थी. लेकिन काम करने वाली कम्पनी केवल क्षतिग्रस्त सडक़ को मलवे से पाट कर चलती बनी, अब मोहल्ले के लोग परेशान है.

कई बार चिरहुला कालोनी वार्ड के पार्षद द्वारा नगर निगम आयुक्त से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई. कंक्रीट सडक़ जहा पर सरिया लगी थी वहा सरिया न लगाकर केवल कंक्रीट कर दिया गया. कई जगह तो कंक्रीट भी नही हुआ है. लिहाजा बरसात के दौरान कीचड़ होगा और सडक़ धस जाएगी, ऐसे में हादसे भी होगे. हाल ही में नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन ने नीम चौराहा सहित कई मोहल्लो में निरीक्षण के दौरान गुणवत्तापूर्ण सडक़ रेस्टोरेशन के निर्देश दिये पर उसका असर दिखाई नही दे रहा है.

निर्देश के बाद भी कछुआ गति से चल रहा काम हाल ही में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने सर्किट हाउस में बैठक के दौरान सीवर लाइन निर्माण से क्षतिग्रस्त सडक़ो का तत्काल रेस्टोरेशन कराए जाने के निर्देश दिये थे. उसके बाद भी काम में गति देखने को नही मिल रही है. बैठक में बताया गया था कि सीवरेज निर्माण के लिये खोदी गई केवल 4 किलो मीटर सडक़ का रेस्टोरेशन शेष है. जबकि हकीकत यह है कि कई किलो मीटर सडक़ ऐसी है जिसका रेस्टोरेशन नही किया गया, वार्ड के लोग परेशान है. महापौर अजय मिश्रा बाबा एवं निगम आयुक्त ने भी बैठक लेकर बरसात के पहले सडक़ रेस्टोरेशन के काम को पूरा करने के निर्देश दिये है लेकिन सीवरेज का कार्य करने वाली कम्पनी के कान में जूं तक नही रेंग रही है, लिहाजा कछुआ गति से काम चल रहा है. 20 दिन बाद मानसून दस्तक दे देगा और काम की गति बेहद धीमी है. कम्पनी पर निर्देशों का कोई असर नही हो रहा है.

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