सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन आरोपियों को सुनायी पांच साल की सज़ा

चेन्नई, 23 मई (वार्ता) तमिलनाडु में चेन्नई के एग्मोर स्थित अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने 1.24 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन लोगों को दोषी करार देते हुये पांच साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनायी है। अदालत ने उन पर कुल 12.9 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

यह मामला केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) चेन्नई द्वारा 14 नवंबर, 2008 को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की प्रशासनिक इकाई, चेन्नई से मिली एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मैसर्स पलपाप इचिनीची सॉफ्टवेयर इंटरनेशनल लिमिटेड और अन्य लोगों ने ‘एक्सप्रेस क्रेडिट स्कीम’ के तहत कंपनी के फर्जी कर्मचारियों के नाम पर पर्सनल लोन मंज़ूर करने और बांटने के मामले में आपराधिक साज़िश रची और बैंक के साथ 1.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।

जांच पूरी होने के बाद, 11 दिसंबर, 2009 को मैसर्स पलपाप इचिनीची सॉफ्टवेयर इंटरनेशनल लिमिटेड और चार अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इनमें से एक आरोपी, जी. वैद्यनाथन की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि बाकी तीन लोगों को अदालत ने दोषी करार दिया।

दोषी ठहराए गए लोगों में कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्रकारी अधिकारी (सीईओ) सेंथिल कुमार, और दो निजी व्यक्ति पी. ए. ससी कुमार और पी. तंजाई चेज़ियन शामिल हैं।

अदालत ने सेंथिल कुमार, ससी कुमार और पी. तंजाई चेज़ियन को पांच साल के कठोर कारावास की सजा के साथ-साथ कुल 11.7 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने आरोपी निजी कंपनी मैसर्स पलपाप इचिनीची सॉफ्टवेयर इंटरनेशनल लिमिटेड पर भी 1.2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

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